राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ट्रंप को मिली पहली बड़ी हार, भारतीय मूल के इन 3 नेताओं ने रच दिया इतिहास

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भारतीय मूल के तीन उम्मीदवारों ने अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी जीत दिलाई है और पिछले साल नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पहली हार का सामना करना पड़ा है। जोहरान ममदानी, आफताब पुरेवाल और गजाला फिरदौस हाशमी उन प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने न्यूयॉर्क सिटी, सिनसिनाटी और वर्जीनिया में अहम चुनाव जीते हैं।

इन तीनों नेताओं को ऐसे समय में जीत मिली है, जब डेमोक्रेटिक पार्टी लगातार चुनावी झटकों का सामना कर रही थी। इसलिए इस जीत का राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से बड़ा महत्व है। हालांकि, ट्रंप ने खुद इन चुनाव को नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने कई उम्मीदवारों का समर्थन किया था। न्यूयॉर्क में ट्रंप ने पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को समर्थन दिया था। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अगर ममदानी जीतेंगे तो वह संघीय फंड रोक देंगे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्जीनिया समेत कई राज्यों में आधे से ज्यादा मतदाताओं ने कहा कि उनका वोट ट्रंप की नीतियों के खिलाफ संदेश देने के लिए था,  खासकर टैरिफ और आव्रजन नीति। फिलहाल भारतीय मूल के तीन नेताओं की जीत ने सियासी माहौल बदल दिया है और रिपब्लिकन पार्टी की गति को रोक दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नतीजे 2026 के मध्यवर्ती चुनावों और 2028 के राष्ट्रपति चुनावों पर क्या असर डालता है…

 

जोहरान ममदानी- न्यूयॉर्क शहर के नए मेयर (डेमोक्रेट)
अमेरिका के सबसे अहम मेट्रो शहरों में शुमार न्यूयॉर्क में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी जीत मिली। उसके उम्मीदवार भारतवंशी जोहरान ममदानी को यहां मेयर चुनाव में जीत मिली। ममदानी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एंड्रयू कुओमो को शिकस्त दी। कुओमो इस चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल कर चुके थे। इसके बावजूद उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।  इसी के साथ ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम और भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर शपथ लेंगे। बता दें कि उनके प्रतिद्वंद्वी एंड्रयू कुओमो के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, जिनका उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। इन्हीं आरोपों के चलते चार साल पहले एंड्रयू कुओमो को गवर्नर पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं निवर्तमान मेयर एरिक एडम्स ने प्राइमरी चुनाव बतौर निर्दलीय लड़ा। पहले एरिक एडम्स डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरना पड़ा।

मेयर पद की दौड़ में एंड्रयू कुओमो की दावेदारी मजबूत थी और इसकी वजह उनका अनुभव, जाना-पहचाना नाम, मजबूत राजनीतिक संपर्क और फंड इकट्ठा करने की काबिलियत थी। हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेताओं और समर्थकों ने जोहरान ममदानी पर दांव लगाया। ममदानी ने प्रचार के दौरान शहर में रहने की बढ़ती लागत को मुद्दा बनाया। साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी के दो वरिष्ठ प्रगतिशील नेताओं रिप्रजेंटेटिव एलेक्जेंड्रिया ओकिशियो कोर्टेज और सीनेटर बर्नी सेंडर्स का भी समर्थन मिला। न्यूयॉर्क को डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माना जाता है।

न्यूयॉर्क सिटी के नए मेयर जोहरान ममदानी भारतीय-अमेरिकी फिल्मकार मीरा नायर के बेटे हैं। उनकी मां मीरा नायर एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हैं, जबकि उनके पिता महमूद ममदानी कोलंबिया विश्वविद्यालय में मानवशास्त्र के प्रोफेसर हैं और उनकी जड़ें गुजरात से जुड़ी हैं। जोहरान का जन्म युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ और जब वे सात साल के थे तो उनके माता-पिता उन्हें न्यूयॉर्क ले आए। साल 2018 में ममदानी को अमेरिकी नागरिकता मिली। ममदानी ने इसी साल सीरियाई मूल की महिला से शादी की है। राजनीति में आने से पहले ममदानी ने बतौर काउंसलर काम किया। ममदानी ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया कि वे शहर के एक प्रतिशत अमीरों पर टैक्स लगाएंगे, जो सालाना 10 लाख डॉलर से ज्यादा कमाते हैं और उस पैसे से मध्यम और निम्न वर्गीय लोगों को सस्ते घर और सस्ता रहन-सहन उपलब्ध कराएंगे। न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शुमार होता है।

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गजाला हाशमी- वर्जीनिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर चुनी गईं (डेमोक्रेट)
गजाला हाशमी का जन्म भारत में हुआ था। उन्होंने वर्जीनिया में लेफ्टिनेंट गवर्नर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को हराया। वर्जीनिया में मंगलवार को मतदान हुआ था।

साल 2025 में हो रहे चुनाव में अमेरिका में अहम पदों पर 30 से ज्यादा भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। गजाला हाशमी एक शिक्षक रही हैं और समावेशी मूल्यों और सामाजिक न्याय की पैरोकार हैं। गजाला हाशमी ने सार्वजनिक शिक्षा, वोटिंग अधिकार और लोकतंत्र की सुरक्षा, बंदूक हिंसा की रोकथाम, पर्यावरण, आवास और किफायती स्वास्थ्य सेवा जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया।

सामुदायिक संगठन ‘द इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड’ ने वर्जीनिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर के लिए आम चुनाव में हाशमी की ऐतिहासिक जीत पर उन्हें बधाई दी। इम्पैक्ट ने कहा कि उसने हाशमी के अभियान में 175,000 अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था ताकि मतदाताओं को एकजुट किया जा सके और सरकार के हर स्तर पर प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जा सके। इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने हाशमी की जीत को समुदाय और लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

हाशमी पहली बार नवंबर 2019 में वर्जीनिया सीनेट के लिए चुनी गई थीं। हाशमी चार साल की थीं जब वह अपनी मां और बड़े भाई के साथ भारत से अमेरिका आईं और जॉर्जिया में अपने पिता के साथ रहने लगीं, जहां उनके पिता इंटरनेशनल रिलेशन्स में PhD कर रहे थे और बतौर शिक्षक अपना करियर शुरू कर रहे थे। गजाला हाशमी हाई स्कूल क्लास में टॉपर रहीं और उन्हें कई फुल स्कॉलरशिप और फेलोशिप मिलीं। हाशमी ने जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ BA और अटलांटा में एमोरी यूनिवर्सिटी से अमेरिकन लिटरेचर में PhD की डिग्री हासिल की। हाशमी और उनके पति अजहर साल 1991 में शादी के बाद वर्जीनिया के रिचमंड में बस गए। गजाला हाशमी ने करीब 30 साल तक पहले यूनिवर्सिटी ऑफ रिचमंड में और फिर रेनॉल्ड्स कम्युनिटी कॉलेज में बतौर प्रोफेसर पढ़ाया।

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आफताब पुरेवाल- सिनसिनाटी के मेयर चुने गए (डेमोक्रेट)
ओहायो के शहर सिनसिनाटी के भारतीय मूल के मेयर आफताब पुरेवाल भी विजयी रहे। पुरेवाल ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार कोरी बोमन को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, पुरेवाल की जीत से सिनसिनाटी के स्थानीय प्रशासन पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण और मजबूत हुआ है। इससे ओहायो की राजनीति में पुरेवाल की स्थिति और सशक्त हुई है। 43 वर्षीय पुरेवाल, जो पहले अमेरिका में विशेष सहायक अटॉर्नी रह चुके हैं, ने 2021 में करीब 66 फीसदी वोट पाकर पहली बार मेयर चुनाव में जीत हासिल की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरेवाल की मां तिब्बती हैं। वह बचपन में चीन के कब्जे से भागकर दक्षिण भारत के एक शरणार्थी शिविर में पली-बढ़ीं। वहीं, उनके पिता पंजाबी हैं। उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार कोरी बोमन को हराया, जो अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के सौतेले भाई हैं।

पुरेवाल ने 2015 में हैमिल्टन काउंटी क्लर्क ऑफ कोर्ट्स के चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। मई में हुए प्राथमिक चुनाव (ओपन प्राइमरी) में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी बोमन को 80 फीसदी से अधिक मतों से हराया था। दोनों शीर्ष उम्मीदवारों के रूप में नवंबर के चुनाव में आमने-सामने आए। बोमन, जिन्होंने पहले कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला था, अपने सौतेले भाई जेडी वैंस के उपराष्ट्रपति पद संभालने से प्रेरित होकर राजनीति में आए। वैंस ने उनके प्रचार अभियान के दौरान सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने भाई के समर्थन में संदेश देते हुए लिखा कि वह एक अच्छे व्यक्ति हैं, जिनका दिल समुदाय की सेवा के लिए धड़कता है और लोगों से उनके लिए वोट करने की अपील की थी।

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