ट्रंप बोले- अगर मैं दखल न देता तो जा सकती थी पाकिस्तानी PM की जान

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मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अगर उन्होंने दखल न दिया होता तो दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान खतरे में पड़ जाती।

ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। ट्रंप के मुताबिक 3.5 करोड़ लोगों ने कहा कि अगर उनका हस्तक्षेप नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मौत हो सकती थी। साथ ही उन्होंंने कहा कि हमने इस्राइल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान, कांगो और रवांडा और कंबोडिया थाईलैंड जैसी लड़ाईयां भी रुकवाईं। ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भी तारीफ की।

ट्रंप पहले भी कर चुके हैं युद्ध रुकवाने का दावा
ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित युद्ध टालने में अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने पिछले साल 10 मई के बाद से भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय 80 से अधिक बार लिया है। पहले भी वह बोर्ड ऑफ पीस के कार्यक्रम और कई बड़े मौके पर इस दावे को दोहराते आए हैं। हालांकि वो कई बार अपने बातों से यू-टर्न भी ले लेते हैं।

युद्ध रुकवाने के दावे को खारिज करता रहा है भारत
अमेरिकी राष्ट्रपति कहते आए हैं कि उस समय हालात बेहद गंभीर थे और उनकी पहल से ये बड़ा टकराव टल गया। हालांकि, भारत हमेशा से उनके दावे को पूरी तरह खारिज करता आया है। विदेश मंत्रालय ने भी साफ कहा था कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से शत्रुता नहीं रोकी गई और यह फैसला दोनों पड़ोसी देशों के डीजीएमओ स्तर पर बात करने के बाद लिया गया था।

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ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानें?

पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। यह कार्रवाई 7 से 10 मई के बीच चली, जिसमें थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय पक्ष ने बड़े पैमाने पर आतंकी ढांचे के ध्वस्त होने का दावा किया। भारत ने यह कार्रवाई आत्मरक्षा में और आतंकवाद के खिलाफ की थी।


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