अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ने ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। जिनपिंग के अमेरिका दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार होना चाहिए- शी जिनपिंग
जिनपिंग ने वहां पहुंचते ही कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार होना चाहिए। वॉशिंगटन पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि दोनों देश नए दौर में एक-दूसरे के साथ संबंधों का सही रास्ता तलाश सकते हैं। शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों महान देश हैं और दोनों देशों के लोगों के हित गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने स्थिर संबंध, सहयोग और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। शी ने कहा कि चीन की राष्ट्रीय पुनर्जागरण की आकांक्षा और अमेरिका को फिर महान बनाने का लक्ष्य साथ-साथ चल सकते हैं और दुनिया को लाभ पहुंचा सकते हैं।
अमेरिका में कहां में ठहरेंगे चीनी राष्ट्रपति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका की राजकीय यात्रा पर पहुंचे हैं। इस दौरान शी जिनपिंग के वॉल्डोर्फ एस्टोरिया में ठहरने की जानकारी सामने आई है। होटल के दृश्य भी सामने आए हैं। यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच अहम बातचीत होने की उम्मीद है।
अमेरिका पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन अमेरिका पहुंचीं। ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग की यह अमेरिकी यात्रा दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले हुई है।
ट्रंप-जिनपिंग की बैठक पर भारत की पैनी नजर क्यों?
छह माह में दूसरी बार जिनपिंग-ट्रंप मुलाकात
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे का एक खास पहलू ये भी हैू कि दोनों नेता एक साल से भी कम समय में दूसरी द्विपक्षीय बातचीत करने के लिए जुटे हैं। जिनपिंग ट्रंप के साथ छह महीनों के भीतर दूसरी बार मिले रहे हैं। शी के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंचीं हैं।
अमेरिका-चीन संवाद से क्या भारत को भी फायदे?
एक तरफ दुनिया की दो महाशक्तियां अमेरिका में बातचीत की पहल कर रही हैं तो इस पर भारत की भी नजरें हैं। दरअसल, बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब पूरी तरह चीन पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं लेंगी, जिससे भारत की एलेक्ट्रोनिक्स व सेमीकंडक्टर पीएलआई योजनाएं आकर्षक बनी रहेंगी। दोनों महाशक्तियों में सीधी बातचीत से एशियाई बाजार और भू-राजनीतिक माहौल में स्थिरता आएगी।
अमेरिका और चीन की बैठक: मुख्य एजेंडा क्या?
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच हो रही खतरा और जिनपिंग की बमुलाकाट के दौरान कई प्रेरक सुझावों का विस्तार से बातचीत होने के आसार हैं। बैठक के मुख्य एजेंडे में टैरिफ, एआई, दुर्लभ खनिज और ताइवान जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ट्रंप का टैरिफ और ट्रेड वॉर
- दोनों देशों के बीच जारी व्यापार युद्ध को रोककर एक नया टिकाऊ व्यापार समझौता बनाना मुख्य प्राथमिकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- एडवांस्ड एआई मॉडल्स के सुरक्षा जोखिमों और अमेरिकी सेमीकंडक्टर,चिप निर्यात नियंत्रण पर औपचारिक वार्ता ढांचा तैयार करना।
क्रिटिकल मिनरल्स व रेयर अर्थ्स
- वैश्विक एआई और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों पर चीनी निर्यात पाबंदियों में ढील।
ताइवान व क्षेत्रीय सुरक्षा
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य संतुलन और ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिरता बनाए रखने पर रुख स्पष्ट करना।
वैश्विक तनाव
- मध्य पूर्व संकट (ईरान युद्ध), वैश्विक नशीले पदार्थों की तस्करी (फेनटैनिल) पर नकेल कसने में चीनी सहयोग।






