इस विधेयक का मकसद यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। चीन के बाद भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।
विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मतदान में 86 सांसदों ने इसके पक्ष में और 12 ने इसके खिलाफ मतदान किया। इस विधेयक में रूस के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी तथा अजरबैजान पर भारी शुल्क (टैरिफ) लगाने की मंजूरी देने का प्रावधान है। इसका मकसद इन देशों की रूस की ऊर्जा पर निर्भरता को कम करना है।
अप्रैल 2025 में पेश किए गए इस विधेयक को लेकर ग्राहम ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मंजूरी दे दी है। यह फैसला अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव के बीच आया था।
रूस पर प्रतिबंध वाला यह विधेयक ऐसे समय में आया, जब पश्चिम एशिया में जंग के कारण भारत की ऊर्जा निर्भरता रूस पर बढ़ गई है। इस जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति रुक गई है। पहले भारत के कुल तेल आयात का करीब 40 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से आता था। इसके बाद तेल कंपनियों को रूस के कच्चे तेल को मुख्य विकल्प के रूप में अपनाना पड़ा।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले कहा था कि इस विधेयक में उन देशों को छूट दी जाएगी, जो रूस से गैस खरीदते हैं। लेकिन उनकी खरीद रूस के कुल गैस आयात के 15 फीसदी से कम है।
प्रतिबंध विधेयक का भारत पर कितना असर?
अमेरिका ने पहली बार अगस्त 2025 में रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार को लेकर कदम उठाया था। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि भारत पुतिन के युद्ध को बढ़ावा दे रहा है।
इसके बाद भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया। यह चीन और ब्राजील के साथ सबसे ज्यादा था। इस नए टैरिफ के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और व्यापार वार्ता रुक गई। हालांकि, फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत समेत पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की स्थिति में पहुंच गई। इसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी थी। इस बड़े संकट के बीच अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर छूट देने की घोषणा की, जिससे भारत को फिर से रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल गई।
अमेरिका के अनुसार, भारत की इस तेल खरीद से रूस को कोई लाभ नहीं होगा। इस छूट के बीच जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र के अनुसार, इन आयातों का मूल्य 4.5 अरब यूरो था। यह रूस के कच्चे तेल से होने वाले कुल निर्यात राजस्व का लगभग 36 फीसदी हिस्सा था।