चौंका रही चांदी की चाल?-: 1 ही दिन में ₹10 हजार बढ़े दाम, 14 महीने का सफर 30 दिन में पूरा, जानें सोने का भाव

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वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक तेजी का दौर जारी है। मंगलवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी ने नए रिकॉर्ड स्तरों को छू लिया। बाजार के लिए सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा चांदी की चाल रही है। जिस चांदी को 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से दो लाख रुपये तक पहुंचने में 14 महीने का वक्त लगा था, उसने दो लाख से तीन लाख रुपये का सफर महज एक महीने में ही तय कर लिया।

सोमवार को तीन लाख प्रति किलोग्राम का स्तर पार करने के बाद मंगलवार को चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलोग्राम के भाव के करीब पहुंच गई। वहीं, सोना ₹1.48 लाख के पार चला गया है। एमसीएक्स पर मंगलवार को कीमती धातुओं में भारी खरीदारी देखी गई।

    • चांदी की छलांग: मार्च डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 9,674 रुपये (3.2%) उछलकर 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तरपर पहुंच गया।
    • सोने की चमक: फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2,560 रुपये (1.76%) बढ़कर 1,48,199 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड करता दिखा।
  • ग्लोबल संकेत: अंतरराष्ट्रीय बाजार (कॉमेक्स) में भी सोना पहली बार 4,700 डॉलर के पार निकलकर 4,722.55 डॉलर प्रति औंस पर और चांदी 94.74 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई।
  • चांदी की ऐतिहासिक रैली: 14 महीने बनाम 1 महीना आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी की हालिया तेजी अभूतपूर्व है।

14 महीनों में कैसे बदली चांदी की कीमत?

  • अक्तूबर 2024 में चांदी का भाव 1 लाख रुपये प्रति किलो था, जिसे 2 लाख रुपये (दिसंबर 2025) तक पहुंचने में 14 महीने लगे थे।
  • इसके उलट, दिसंबर 2025 से 19 जनवरी 2026 के बीच- मात्र एक महीने में- चांदी दो लाख से बढ़कर तीन लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गई।
  • पिछले दो कारोबारी सत्रों में ही चांदी की कीमतों में 32,187 रुपये (11.18%) का उछाल दर्ज किया गया है।
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क्या है तेजी का प्रमुख कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में इस विस्फोटक तेजी के पीछे कई मैक्रोइकोनॉमिक और भू-राजनीतिक कारक काम कर रहे हैं-

  1. भू-राजनीतिक संकट: ईरान के साथ बढ़ता तनाव, वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य दबाव और ग्रीनलैंड पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद NATO से जुड़ी अनिश्चितताओं ने ‘ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट’ को नाजुक बना दिया है।
  2. सप्लाई-डिमांड गैप: चांदी की औद्योगिक मांग (सोलर पावर, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स) लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई में कमी (Shortage) देखी जा रही है।
  3. पोर्टफोलियो इंश्योरेंस: स्मार्ट वेल्थ एआई के फाउंडर, पंकज सिंह का कहना है कि वैश्विक विकास दर की अनिश्चितता के बीच निवेशक बुलियन को ‘मोमेंटम ट्रेड’ के बजाय ‘पोर्टफोलियो इंश्योरेंस’ के तौर पर देख रहे हैं।

क्या अभी चांदी खरीदकर पैसे बन सकते हैं? 

अब बड़ा सवाल है कि क्या वर्तमान कीमतों के बावजूद चांदी में निवेश कर बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है? आइए इसका जवाब जानते हैं। जहां कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं कुछ विश्लेषक मौजूदा हालात में सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

  • गिरावट के संकेत: एक हालिया ‘ऑग्मेंट रिपोर्ट’ के मुताबिक, इतनी तेज रैली के बाद मुनाफावसूली आ सकती है। रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि कीमतें 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर सकती हैं, हालांकि इसके बाद दोबारा तेजी आने के आसार हैं।
  • बजट पर नजर: निवेशक अब 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में सोने पर आयात शुल्क से जुड़े संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

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