यमुना से तबाही- मथुरा-वृंदावन में हालात हुए बेकाबू…लक्ष्मीनगर में एक-एक मंजिल तक पानी भरा, तेजी से बढ़ रही यमुना

 

थुरा में यमुना में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से दिन-प्रतिदिन जिले के हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। रविवार को पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि लक्ष्मीनगर में एक-एक मंजिल तक पानी भर गया। सदर बाजार, जयसिंहपुरा समेत वृंदावन की दर्जनों कॉलोनियां भी लबालब भर गईं। 

बेकाबू धार से घाट डूब गए और सड़कों तक पानी आ गया। साथ ही जिले के 45 गांव ऐसे हैं जो टापू बन गए हैं। प्रशासन ने इस गांव के नौ हजार लोगों का रेस्क्यू कर राहत शिविरों में भेजा है। साथ ही टीम लगातार राहत व बचाव कार्य में जुटी है।

UP Floods news Situation out of control in Mathura-Vrindavan Water filled up to one floor in Laxmi Nagar

 

यमुना का जलस्तर 167.55 मीटर दर्ज
बीते एक सप्ताह से जिले में आई बाढ़ से जनजीवन को अस्तव्यस्त हो गया है। रविवार को यमुना का जलस्तर 167.55 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 166 मीटर से 1.55 मीटर अधिक है। लगातार बढ़ते जलस्तर से मथुरा-वृंदावन की कई बस्तियों और कॉलोनियों को अपने आगोश में ले लिया है। 

 

स्थिति यह है कि लोगों को घर छोड़ने तक का मौका नहीं मिल पा रहा है। रात को चैन की नींद सोते हैं और सुबह उठकर पता चलता कि उनके घर के बाहर यमुना का पानी आ गया है। यही स्थिति रविवार को लक्ष्मीनगर के तिवारीपुरम, ईशापुर समेत दर्जन कॉलोनियों में दिखी।

लोगों का कहना है कि शनिवार देर रात कोई उनके कॉलोनी के आसपास पानी नहीं था, लेकिन सुबह लोगों ने देखा तो सकड़ पर पानी बह रहा था। इन कॉलोनियों में दोपहर बाद इतना पानी भर गया कि एक-एक मंजिल मकानों की छत तक पानी पहुंच गया।

 

हथिनीकुंड से 44016 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
इधर, जिले के करीब 45 गांव बाढ़ की चपेट से टापू बन गए हैं। इसमें नौहझील, सौंख क्षेत्र, मांट, शेरगढ़ समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इसमें सबसे ज्यादा नौहझील क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है। सिंचाई विभाग अपर खंड के एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि रविवार शाम पांच बजे हथिनीकुंड से 44016 क्यूसेक और ओखला से 1.6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि गोकुल बैराज से 1.56 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि शुक्रवार से हथिनीकुंड से कम मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में सोमवार के बाद लगातार यमुना का जलस्तर लगातार कम होगा। साथ ही कहा कि अगर अगले दिनों तक बारिश नहीं हुई, तो जलस्तर में गिरावट आएगी और हालात कुछ हद तक सुधरेंगे।

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डीएम-एसएसपी ने लक्ष्मीनगर में राहत सामग्री बांटी
रविवार को लक्ष्मीनगर क्षेत्र में हालात बेकाबू होने के बाद डीएम चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने मौके पर जाकर स्थिति परखी। दोनों अधिकारी ट्रैक्टर पर बैठकर तिवारीपुरम पहुंचे और लोगों की समस्याओं को नजदीक से देखा। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। इस दौरान राहत सामग्री और खाने-पीने का सामान भी वितरित कराया गया।

 

इसके साथ ही डीएम ने शेल्टर होम का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं परखा। उन्होंने साफ-सफाई, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हाल में प्रभावित परिवारों को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

 

वहीं एडीएम डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित 45 गांव में लगातार राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। साथ ही लोगों को भी राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। रविवार को करीब दर्जनों गांव और कॉलोनियों से नौ हजार से अधिक लोगों को राहत शिविर में शरण दी है।

 

घाटों की ओर जाने वाले मार्ग बंद, दुकानें भी रहीं बंद
यमुना विश्राम घाट के आसपास मार्गों तक आ गया है। सड़क पर दो-दो फीट तक पानी बह रहा है। सुरक्षा की वजह से प्रशासन ने घाटों की ओर जाने वाले मार्गों को फिलहाल बंद कर दिया है। जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि लोग खतरे वाले रास्ते पर न जाएं। इसके साथ ही बाढ़ का असर व्यापार पर भी पड़ा है। विश्राम घाट के आसपास की कई दुकानें रविवार को पूरे दिन बंद रहीं।

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200 मकान बाढ़ में डूबे
नौहझील में यमुना का जलस्तर ग्रामीणों पर कहर बनकर टूट रहा है। अतिसंवेदनशील 9 गांवों अड्डा छिनपारई, छिनपारई, दौलतपुर, बसाऊ, अड्डा मल्हान, अड्डा मीणा, फिरोजपुर, मांगरखोर, अड्डा जाटव में लगभग 200 मकान डूब गए हैं। इनमें रखा लाखों रुपये का खाने-पीने व जरुरत का सामान खराब हो गया है। घरों में 5-6 फीट ऊंचाई तक व गांवों में 3-4 फीट ऊंचाई तक पानी तेज बहाव के साथ हिलोरें मार रहा है।

 

लगभग एक दर्जन मकानों की दीवारें ढ़ह गई हैं। 3 दर्जन गांवों में किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कस्बे के बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। एसडीएम रितु सिरोही, तहसीलदार बृजेश कुमार ने बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों के खाने-पीने के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की।

 

बैरियर लगाया, दर्शन पर रोक
मांट-पानीगांव मार्ग पर बाढ़ का पानी आने से प्रशासन ने बैरियर लगाकर यहां वाहनों का आवागमन बंद कर दिया है। सड़क पर करीब चार फीट पानी बह रहा है। एसडीएम मांट रितु सिरोही ने बताया की पानी के बहाव से सड़क कट गई है।

 

कभी भी हादसा हो सकता है इसलिए वाहनों को रोक दिया है। इसके अलावा राधारानी मानसरोवर में भी पानी बढ़ गया। अगले कुछ दिन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए रोक लगा दी है। केवल मंदिर के सेवायतों द्वारा पूजा की जाएगी।

 

जलस्तर खतरे का निशान पार होते ही सीडब्ल्यूसी ने रेल अलर्ट घोषित किया
यमुना नदी का जलस्तर खतरे का स्तर पार करने के बाद केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने मथुरा में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है। आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक नदी का जलस्तर 166.30 मीटर से अधिक पहुंचने पर गंभीर श्रेणी दर्ज किया जाता है, जबकि वर्तमान में यमुना का जलस्तर 167.55 मीटर है। इसी को लेकर रविवार को लखनऊ स्थित केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने पत्र जारी कर जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह को सतर्क रहने को कहा है।

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पत्र में बताया कि शनिवार देर रात यमुना का जलस्तर निर्धारित खतरे की सीमा को पार कर गया। सुबह तक यह और बढ़ गया, जिससे प्रशासनिक चिंता बढ़ गई है। सीडब्ल्यूसी के अनुसार, अब नदी का जलस्तर रेड अलर्ट जोन में है और किसी भी समय बाढ़ का स्तर और बढ़ सकता है।

 

इधर, रेड अलर्ट घोषित होने के बाद जिला प्रशासन ने सभी घाटों और निचले इलाकों को खाली कराने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही आम जनता से अपील की है कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें और पूरी सतर्कता बरतें। विशेषकर निचले इलाकों के लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

 

कांग्रेसियों ने भी बांटी राहत सामग्री
प्रशासन व स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ-साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कांग्रेसी भी राहत कार्य में जुट गए हैं। रविवार को जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर ने रांची बांगर के श्रीजी बिहार एवं गणेश पुरम में राहत सामग्री बांटी। साथ ही लोगों को आश्वस्त किया गया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।

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