टाटा संस- एजीएम से पहले अध्यक्ष चंद्रशेखरन ने पद से दिया इस्तीफा

टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले पद छोड़ने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों से इस संभावना पर चर्चा के बाद इस्तीफा दे दिया है।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा है कि जब उनका कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा तो वे पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे और उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी का फैसला करने को कहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कहना है कि पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को बोर्ड का सर्वसम्मति से समर्थन नहीं मिला; वे दूसरे कार्यकाल के लिए आवेदन नहीं करेंगे।
यह स्थिति उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सामने आई है। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चंद्रशेखरन स्वयं इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे। वह शेयरधारकों के संभावित विवादास्पद मतदान पर अपना भविष्य नहीं छोड़ना चाहते थे।

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी है। अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए उनका टाटा संस के निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। कंपनी की एजीएम में 18 अगस्त को उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर शेयरधारकों द्वारा मतदान किया जाना है। समूह के भीतर कुछ अहम मुद्दों पर मतभेदों की खबरें भी सामने आ रही हैं।

क्या है नेतृत्व में बदलाव की वजह?

यह अनिश्चितता टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों से जुड़ी बताई जा रही है। टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है। यह समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फरवरी में टाटा संस के मंडल ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। इसी वजह से मंडल ने इस विषय पर अंतिम निर्णय को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

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चंद्रशेखरन का टाटा समूह से जुड़ाव कैसा रहा है?

एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने वर्ष 1987 में समूह में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। बाद में वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2017 में उन्हें टाटा संस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनका अनुभव समूह के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है।

 

शेयर बाजार पर क्या पड़ा असर?

इन अटकलों का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। बुधवार सुबह कारोबार के दौरान टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। टाटा उपभोक्ता उत्पाद का शेयर एनएसई पर एक फीसदी से अधिक गिरकर करीब 1,066 रुपये पर कारोबार करता दिखा। टीसीएस का शेयर भी लगभग एक फीसदी फिसलकर 2,424.50 रुपये के आसपास पहुंच गया। टाइटन कंपनी का शेयर करीब 1.03 फीसदी की गिरावट के साथ 5,075.10 रुपये पर कारोबार करता दिखा। टाटा पावर का शेयर लगभग 0.9 फीसदी गिरकर 376.60 रुपये पर पहुंच गया।

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