सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 25 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर करने वाले वकील को सलाह दी कि उन्हें अदालत में आने के बजाय संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। जैसे ही मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ, याचिकाकर्ता और वकील सचिन गुप्ता ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि वह अपनी पीआईएल वापस लेना चाहते हैं।
पीठ ने गुप्ता से कहा, “आप अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करें। आपको अदालतों में आने के बजाय अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए, उन्हें कुछ मुद्दों पर अधिक जानकारी देनी चाहिए।” सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे।
‘अधिकारियों को संवेदनशील बनाने की कीजिए कोशिश’ : सीजेआई सूर्यकांत
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उचित समय आने पर अगर जरूरत हुई तो न्यायालय उनकी याचिकाओं पर भी विचार करेगा। सीजेआई सूर्यकांत ने जोर दिया कि एक वकील और कानूनी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के रूप में याचिकाकर्ता को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का प्रयास करना चाहिए।
पीठ ने कहा कि अगर कुछ नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता अदालत का रुख कर सकता है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई 25 पीआईएल वापस लेने की अनुमति दे दी।
किन मामलों पर लगाई थीं जनहित याचिकाएं?
याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई पीआईएल में देश में आधिकारिक उद्देश्यों के लिए एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने हेतु नीति बनाने और आम जनता के बीच कानूनी ज्ञान फैलाने के लिए टेलीविजन पर कानूनी जागरूकता शो हेतु नीति का मसौदा तैयार करने सहित विभिन्न दिशा-निर्देशों की मांग की गई थी।
पीआईएल में साबुन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने और केवल उन्हीं रसायनों की अनुमति देने के लिए नीति बनाने की दिशा में निर्देश शामिल थे जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हैं, न कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को। एक अन्य पीआईएल में भिखारियों, ट्रांसजेंडर आदि जैसे वंचित समूहों के उत्थान के लिए नीति बनाने की दिशा में निर्देश मांगे गए थे।
पहले भी खा चुके हैं सुप्रीम कोर्ट से फटकार
गौरतलब है कि नौ मार्च को शीर्ष अदालत ने गुप्ता द्वारा दायर पांच बेकार जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें यह वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग भी शामिल थी कि क्या प्याज और लहसुन में “तामसिक” (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।
उस समय मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था, “आधी रात को यह सब याचिका ड्राफ्ट करते हो क्या?” और पीआईएल को “अस्पष्ट, बेकार और निराधार” करार दिया था। पीठ ने गुप्ता द्वारा दायर चार अन्य पीआईएल को भी खारिज कर दिया था, जिसमें शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित तौर पर हानिकारक सामग्री को विनियमित करने के निर्देश मांगे गए थे।









