Sunita Williams: भारत में कल्पना चावला की मां-बहन से मुलाकात, साझा किए अंतरिक्ष के 27 साल के अनुभव

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भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 60 साल की आयु पूरी होने पर अंतरिक्ष एजेंसी- नासा से रिटायर हो गईं। सुनीता फिलहाल भारत दौरे पर हैं। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपने ढाई दशक से अधिक लंबे करियर में मिले अंतरिक्ष से जुड़े अनुभवों को साझा किया। उन्होंने हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मां और उनकी बहन से भी मुलाकात की।

 

अंतरिक्ष मिशन तभी सफल, जब देश मिलकर काम करें
एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा है कि इस समय दुनिया में एक तरह की ‘स्पेस रेस’ जरूर चल रही है, लेकिन इसका मकसद प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि मानवता की चांद पर सुरक्षित, टिकाऊ और लोकतांत्रिक तरीके से वापसी सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरिक्ष मिशन तभी सफल होंगे, जब देश मिलकर काम करें। मंगलवार को दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर में आयोजित एक इंटरैक्टिव कार्यक्रम में सुनीता विलियम्स ने युवाओं से खुलकर बातचीत की। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने कहा कि भारत आना उनके लिए घर लौटने जैसा है, क्योंकि उनके पिता का जन्म भारत में हुआ था।

रिटायरमेंट से पहले युवाओं के साथ संवाद
नीले रंग के स्पेस सूट और स्पेस थीम वाले जूतों में मंच पर पहुंचीं 60 वर्षीय सुनीता विलियम्स का युवाओं ने जोरदार स्वागत किया। करीब एक घंटे तक चली बातचीत में उन्होंने अपने अनुभव हल्के-फुल्के अंदाज और हास्य के साथ साझा किए। बता दें कि सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो में हुआ था। उनके पिता दीपक पांड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से हैं, जबकि उनकी मां स्लोवेनिया मूल की हैं। वह अमेरिकी नौसेना में कैप्टन रह चुकी हैं।

जब अंतरिक्ष में 9 महीने तक रहीं भारत की बेटी
बातचीत के दौरान उन्होंने उस चुनौतीपूर्ण अनुभव को भी साझा किया, जब उनका 8 दिन का मिशन बढ़कर 9 महीने से ज्यादा का हो गया। बोइंग के अंतरिक्ष यान में आई तकनीकी दिक्कतों के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में लंबे समय तक रुकना पड़ा। इस दौरान आईएसएस के वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्री थैंक्सगिविंग, क्रिसमस और जन्मदिन मनाते नजर आए। इस पर हंसते हुए सुनीता ने कहा कि हम अच्छे गायक नहीं हैं, लेकिन अंतरिक्ष में केक जरूर बना लेते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार आईएसएस पर एक साथ 12 अंतरिक्ष यात्री रहते हैं और यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण है।

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‘स्पेस रेस’ पर क्या बोलीं?
इसके साथ ही जब उनसे पूछा गया कि निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से क्या स्पेस रेस तेज हो रही है, तो उन्होंने कहा कि हां, एक स्पेस रेस है। लेकिन यह इस बात की रेस है कि हम चांद पर सही नियमों, सहयोग और साझा समझ के साथ कैसे लौटें। उन्होंने चांद की तुलना अंटार्कटिका से करते हुए कहा कि वहां भी सभी देश मिलकर काम करते हैं और चांद पर भी ऐसा ही होना चाहिए।

अंतरिक्ष में भारत की भूमिका पर भी बोलीं विलियम्स
इस दौरान सुनीता विलियम्स ने बताया कि आर्टेमिस अकॉर्ड्स के जरिए कई देश चांद मिशन में सहयोग कर रहे हैं और भारत भी इसका हिस्सा है। भारत का लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाना और 2040 तक भारतीय को चांद पर भेजना है। उन्होंने निजी कंपनियों की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि इससे युवाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में नई नौकरियां और अवसर पैदा हो रहे हैं, चाहे वह रॉकेट हों, सैटेलाइट, नई तकनीक या 3डी प्रिंटिंग।

जीवन पर अंतरिक्ष का असर
अंत में सुनीता विलियम्स ने कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के बाद इंसान का नजरिया बदल जाता है। ऊपर से देखने पर लगता है कि हम सब एक हैं। तब समझ आता है कि आपसी झगड़े कितने बेकार हैं। यह एहसास इंसान को और ज्यादा साथ मिलकर चलने की सीख देता है। सुनीता विलियम्स की यह बातचीत युवाओं के लिए न सिर्फ प्रेरणादायक रही, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि अंतरिक्ष की असली जीत सहयोग में है, प्रतिस्पर्धा में नहीं।

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