मंगोलियाई ऊंट की खासियत?: कर्तव्य पथ पर पूर्वी एशिया से आया खास मेहमान, परेड में शामिल मंगोलियाई ऊंट की खासियत जानिए

26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस के परेड में देश की सैन्य शक्ति, भौगोलिक विविधता और साहसिक कौशल का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला। कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट (मंगोलियाई ऊंट) को शामिल किया गया। गणतंत्र दिवस पर पहली बार ये खास ऊंट  कर्तव्य पथ पर दिखे।आइए जानते हैं कि बैक्ट्रियन ऊंट की क्या खासियत है। 

क्यों सेना में शामिल किए गए बैक्ट्रियन ऊंट? 

  • वर्तमान समय में भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों को भी अपना रही है।
  • पूर्वी लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना की मदद के लिए दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट को शामिल किया गया है।
  • बैक्ट्रियन ऊंट ऊंचाई वाले इलाकों में भारी सामान ले जाने और पेट्रोलिंग में बेहद मददगार साबित होते हैं।

 

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क्या है इस ऊंट की खासियत?

  • बैक्ट्रियन ऊंट दो कूबड़ वाले होते हैं। यह मंगोलिया और मध्य एशिया में मिलते हैं, जो 15,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर आसानी से काम कर सकते हैं।

 

  • सबसे बड़ी खासियत है कि ये 150 से 200 किलो तक का भार उठा सकते हैं। माइनस 40 डिग्री तापमान में भी बिना किसी परेशानी के काम करते हैं।

 

  • भारतीय सेना इनका लास्ट माइल डिलीवरी और पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल कर रही है।

 

कहां पर सेना कर रही इस्तेमाल?

  • बैक्ट्रियन ऊंट बीते दो साल से पूर्वी लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की मदद कर रहे हैं। ये सेना के लिए रसद पहुंचाने का काम करते हैं।
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  • पहले बैच में एक दर्जन से अधिक ऊंटों को शामिल किया गया है। इन ऊंटों को लद्दाख के हुंडर गांव में पाला जाता है।

 

  • माना जाता है कि ऊंटों की इस नस्ल को पुराने सिल्क रूट के व्यापारियों ने लद्दाख में लाया था।

 

क्यों कहा जाता है कोल्ड डेजर्ट वॉरियर? 

  • अपनी असाधारण सहनशक्ति के लिए पहचाने जाने वाले इस ऊंट के शरीर की बनावट इन्हें हड्डियों को जमा देने वाली ठंड से बचाती है।

 

  • ये ऊंट बिना पानी और भोजन के कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। पूर्वी लद्दाख के मुश्किल हालातों में ये सेना के भरोसेमंद साथी साबित होते हैं।

 

भारत में कहां मिलते हैं बैक्ट्रियन ऊंट?

  • भारत में बैक्ट्रियन ऊंट मुख्य तौर पर लद्दाख और कोल्ड डेजर्ट इलाकों में पाए जाते हैं।

 

  • इन इलाकों का तापमान माइनस में चला जाता है, हवा तेज होती है और ऑक्सीजन कम रहती है। इसलिए इन्हें कोल्ड डेजर्ट वॉरियर कहा जाता है।
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