पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज बाएं हाथ के बल्लेबाज सौरव गांगुली को बुधवार (8 जुलाई) को आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। इसके साथ ही वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर बन गए।
आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने के बाद सौरव गांगुली अब भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों की खास सूची का हिस्सा बन गए हैं। इस सूची में सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले, वीनू मांकड़, डायना एडुल्जी, नीतू डेविड और एमएस धोनी जैसे महान खिलाड़ियों के नाम पहले से शामिल हैं।
सौरव गांगुली का अंतरराष्ट्रीय करियर कितना शानदार रहा?
54 वर्षीय सौरव गांगुली ने 1992 से 2008 तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। अपने 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने 113 टेस्ट और 311 वनडे मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 7,212 रन बनाए और 32 विकेट लिए। वहीं, वनडे क्रिकेट में उनके नाम 11,363 रन और 100 विकेट दर्ज हैं। सौरव गांगुली ने कप्तान के तौर पर भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 2003 आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया।
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने सीमित ओवरों के प्रारूप में हाल में भारत के प्रदर्शन में आई गिरवाट पर हैरानी जताई है। उन्होंने साथ ही टी20 विश्व चैंपियन टीम का वापसी के लिए समर्थन किया। गांगुली ने हालांकि विश्व कप विजेता टीम के स्टार संजू सैमसन को प्लेइंग-11 में जगह नहीं देने पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ भारत को 125 रन की करारी हार का सामना करना पड़ा। टीम 202 रन के लक्ष्य पीछा करते हुए 76 रन पर सिमट गई। यह रनों के लिहाज से भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार थी। इस हार के बाद भारत पांच मैच की सीरीज में 0-2 से पीछे हो गया है।
सैमसन को बाहर करने पर नहीं दिया जवाब
सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला तब आया जब गौतम गंभीर की अगुआई वाले भारतीय टीम प्रबंधन ने दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय से सैमसन को बाहर कर दिया जिससे कि युवा वैभव सूर्यवंशी को शीर्ष क्रम में जगह दी जा सके। जब इस फैसले के बारे में पूछा गया तो गांगुली ने कहा, यह फैसला टीम प्रबंधन को करना है। इस पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।








