SC:- डिजिटल धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- यह सरासर डकैती है, पूरे देश में लागू हो एसओपी

 

देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए इसे डकैती या लूट करार दिया है। अदालत ने कहा कि अब तक ₹54,000 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को पूरे देश में औपचारिक रूप से लागू किया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

 

 

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों की लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और बैंकों से कहा कि वे ऐसे मामलों में समय पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान अदालत ने बताया कि आरबीआई ने पहले ही एक एसओपी तैयार किया है, जिसके तहत साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर अस्थायी रूप से डेबिट कार्ड को होल्ड पर डालने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को तुरंत रोकना है।

 

अंतर-विभागीय समन्वय के लिए बड़ा आदेश
डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अंतर-विभागीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए चार सप्ताह के भीतर एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) तैयार किया जाए। अदालत ने साफ शब्दों में कहा हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह आरबीआई की एसओपी को औपचारिक रूप से अपनाए और पूरे भारत में लागू करे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह देशभर में सामने आए डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान करे और उनसे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जाए।

और पढ़े  दिल्ली: नरेला में 14.95 लाख से मिलेंगे डीडीए के फ्लैट, 25% छूट के साथ आज से 2516 घरों की बुकिंग

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकारों से कहा है कि जिन मामलों की पहचान की जाए, उनमें जांच के लिए आवश्यक मंजूरी (सैंक्शन) बिना देरी के प्रदान की जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरबीआई, दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य संबंधित एजेंसियां आपस में समन्वय कर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें। इस बैठक का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार करना होगा।

पीड़ितों के प्रति उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देते समय तकनीकी जटिलताओं में उलझने के बजाय एक व्यावहारिक और उदार रवैया अपनाया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसे अपराधों में आम नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से गहरा नुकसान झेलता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • Related Posts

    मन की बात- बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस: मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, त्योहारी मौसम के लिए की क्या अपील?

    प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस…

    दिल्ली: राजधानी में पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़, 1 लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार

    दिल्ली पुलिस ने साउथ दिल्ली में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश को गिरफ्तार किया है। यह बदमाश काफी समय से पुलिस की पकड़…