Safety: ह्यूंदै ग्रैंड i10 को GNCAP में 0-स्टार, अफ्रीकी बाजार के लिए भारत में बनी कार की सुरक्षा पर सवाल

फ्रीकी बाजार के लिए भारत में निर्मित Hyundai Grand i10 (ह्यूंदै ग्रैंड आई10) को Global NCAP (ग्लोबल एनसीएपी) के नवीनतम क्रैश टेस्ट में एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में जीरो स्टार और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में तीन स्टार मिले हैं। वयस्क सुरक्षा के लिए कार ने 0/34 अंक, जबकि बच्चों की सुरक्षा के लिए 28.57/49 अंक हासिल किए। यह नतीजा कार की सुरक्षा क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

 

क्रैश टेस्ट में क्या सामने आया
ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट ने बताया कि फ्रंटल इम्पैक्ट टेस्ट में ड्राइवर के सीने की सुरक्षा बेहद कमजोर पाई गई। वहीं साइड इम्पैक्ट टेस्ट में चोट का जोखिम इतना अधिक था कि यह अधिकतम सीमा से ऊपर चला गया, जिसके बाद एडल्ट प्रोटेक्शन को जीरो अंक दिए गए।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कार का बॉडीशेल और फुटवेल एरिया अस्थिर हैं और अतिरिक्त लोडिंग सहन नहीं कर सकते। अफ्रीकी मॉडल में साइड बॉडी या हेड एयरबैग मौजूद नहीं हैं। सीट-बेल्ट रिमाइंडर सिर्फ ड्राइवर के लिए है और ESC (इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल) भी स्टैंडर्ड रूप में उपलब्ध नहीं है।

ग्लोबल NCAP के सीईओ रिचर्ड वुड्स ने कहा, “कम और मध्यम आय वाले देशों में सुरक्षा को लेकर यह दोहरा रवैया अस्वीकार्य है। दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले उपभोक्ताओं को सुरक्षित वाहन मिलने चाहिए।”

भारत-विशेष मॉडल से क्या अंतर है
परीक्षण में शामिल ग्रैंड i10 अफ्रीकी-स्पेक मॉडल था, जबकि भारत में बिकने वाली ग्रैंड i10 Nios की सुरक्षा पैकेज कहीं अधिक मजबूत है। भारतीय मॉडल में स्टैंडर्ड रूप से उपलब्ध सुरक्षा फीचर्स में शामिल हैं:

  • ड्राइवर और पैसेंजर एयरबैग
  • साइड और कर्टेन एयरबैग
  • ABS
  • फ्रंट सीट-बेल्ट प्री-टेंशनर्स
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उच्च वेरिएंट में अतिरिक्त फीचर्स मिलते हैं, जैसे:

  • इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम
  • व्हीकल स्टेबिलिटी मैनेजमेंट
  • हिल-स्टार्ट असिस्ट

हालांकि ISOFIX चाइल्ड माउंट्स सिर्फ टॉप वेरिएंट में ही उपलब्ध हैं।

सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
भारत में निर्मित कारों के विदेशी बाजारों के लिए अलग और कई बार कमजोर सुरक्षा मानकों पर ग्लोबल NCAP के इस परिणाम ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा स्तर किसी भी बाजार में समान होना चाहिए, ताकि सभी यात्रियों को समान सुरक्षा मिल सके।
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