राजस्थान: शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का सुझाव, हर 5 साल में शिक्षकों का मूल्यांकन हो: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों का हर पांच साल में मूल्यांकन करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि इस मूल्यांकन का उद्देश्य शिक्षण स्तर को सुधारना है, इससे शिक्षकों की नौकरी या पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

कोटा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “स्वस्थ एवं शिक्षित महिला: सशक्त राष्ट्र” के उद्घाटन के दौरान राज्यपाल ने कहा कि देश का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं होता, बल्कि अच्छे शिक्षित, जिज्ञासु और ईमानदार नागरिकों से भी होता है। इस कार्यशाला में देशभर से करीब 300 वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सा विशेषज्ञ, शोधकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्रों ने हिस्सा लिया।

हर 5 साल में शिक्षकों के मूल्यांकन का सुझाव

  • राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने छात्रों और शोधकर्ताओं से लगातार पढ़ाई करने और नए सवाल पूछने की आदत विकसित करने की अपील की।
      • उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक शिक्षा के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया।
      • शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उन्होंने शिक्षकों का हर 5 साल में मूल्यांकन करने का सुझाव दिया।
      • उनका कहना है कि इससे शिक्षकों के ज्ञान और पढ़ाने की क्षमता का आकलन किया जा सकेगा।
      • मूल्यांकन से छात्रों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता की सही तस्वीर सामने आएगी।
      • राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का शिक्षकों की नौकरी या पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
      • उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है, लेकिन इससे सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।
    • बागड़े ने राजस्थान को नशा-मुक्त बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
    • उन्होंने देश से टीबी (तपेदिक) खत्म करने के अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
    • राज्यपाल ने सामाजिक और शैक्षणिक विकास में सभी की भागीदारी पर जोर दिया।
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पेपर लीक और डमी एडमिशन पर जताई चिंता

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि जिस तरह देश टीबी जैसी समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रयास कर रहा है, उसी तरह पेपर लीक की समस्या को खत्म करने के लिए भी सभी को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों से लेकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों तक, सभी की इसमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्कूलों में बढ़ रहे डमी एडमिशन के मामलों पर भी चिंता जताई। राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को ऐसे स्कूलों का डेटा जुटाने के निर्देश दिए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई की जा सके। वहीं, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि गरीब और वंचित लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर डॉ. विमला डंकवाल ने कहा कि “नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है” और समावेशी विकास हासिल करने के लिए हर लड़की और महिला को अच्छी शिक्षा और हेल्थकेयर देने की जरूरत पर जोर दिया। नेशनल वुमन एक्शन कोऑर्डिनेटर डॉ. शोभा पैथनकर ने भी फास्ट फूड पर बढ़ती निर्भरता और सेहत पर इसके बुरे असर को लेकर चिंता जताई।

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