RTI में हुआ खुलासा- भारत में मौसम की मार, मार्च-जून के बीच 7 हजार से अधिक हीटस्ट्रोक के मामले, 14 लोगों की मौत

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भारत में इस साल गर्मी का प्रकोप बेहद गंभीर रहा। मार्च से 24 जून 2025 तक देशभर में 7,192 संदिग्ध हीटस्ट्रोक के मामले दर्ज किए गए और 14 मौतों की पुष्टि हुई है। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों में सामने आई है, जो नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) द्वारा साझा किए गए हैं।

इन आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में सबसे अधिक 2,962 संदिग्ध मामले सामने आए और सिर्फ 3 मौतों की पुष्टि हुई। अप्रैल में 2,140 मामलों में छह मौतें दर्ज हुईं, जबकि मार्च में 705 मामलों में दो और जून (24 जून तक) में 1,385 मामलों में तीन मौतें दर्ज की गईं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये आंकड़े जमीनी सच्चाई से काफी कम हो सकते हैं क्योंकि रिपोर्टिंग व्यवस्था पूरी तरह कारगर नहीं है।

 

आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले
हीटस्ट्रोक के कुल मामलों में से आधे से अधिक सिर्फ आंध्र प्रदेश से दर्ज हुए, जहां 4,055 संदिग्ध मामले रिपोर्ट हुए। राजस्थान में 373, ओडिशा में 350, तेलंगाना में 348 और मध्य प्रदेश में 297 मामलों की रिपोर्टिंग हुई। हालांकि, कई राज्यों ने सैकड़ों मामलों के बावजूद एक भी मौत की पुष्टि नहीं की, जिससे रिपोर्टिंग सिस्टम की कमजोरियों पर सवाल उठते हैं।

मौत के आंकड़े भी अलग-अलग
एनसीडीसी द्वारा 2015 से 2022 के बीच हीट से हुई कुल मौतों की संख्या 3,812 बताई गई, जबकि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने इसी अवधि में 8,171 मौतों और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 3,436 मौतों का दावा किया है। इससे स्पष्ट है कि हीटवेव से संबंधित मौतों की सही गणना करना भारत में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अस्पतालों की स्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मौतों की सही रिपोर्टिंग करना बेहद कठिन है क्योंकि अधिकतर अस्पतालों में स्टाफ की कमी है और मैनुअल डेटा एंट्री होती है। इससे सही समय पर जानकारी भेजना और मौत को हीट से जोड़ना मुश्किल हो जाता है। अधिकारी ने यह भी माना कि कई बार अस्पतालों के बाहर हुई मौतों को दर्ज ही नहीं किया जाता।

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ठोस नीति जरूरी
जलवायु और स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभियंत तिवारी के अनुसार, हीट से होने वाली मौतों को दिल का दौरा या अन्य कारणों से जोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एक्सेस डेथ डेटा यानी अचानक बढ़ी मौतों का विश्लेषण करना ज्यादा सटीक तस्वीर देता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार सौम्या स्वामीनाथन ने भी कहा कि जब तक रिपोर्टिंग सिस्टम मजबूत नहीं होगा, तब तक बेहतर नीति नहीं बनाई जा सकती।


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