शाहजहांपुर: 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले सेवानिवृत्त कर्नल केके चौधरी का निधन

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 कर्नल एकेडमी के चेयरमैन सेवानिवृत्त कर्नल केके चौधरी का शनिवार सुबह निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। उनकी अंत्येष्ठि में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर नम आंखों से विदाई दी।

रविवार की सुबह करीब चार बजे कर्नल केके चौधरी को बेचैनी होने लगी। पसीना आने पर परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल लेकर गए। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना पर तमाम लोग सेठ एन्क्लेव स्थित आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंचे।

 

पूरे दिन लोग पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे। शाम करीब चार बजे सैनिक सम्मान के साथ खन्नौत स्थित मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके निधन से पत्नी नीला चौधरी, बेटा प्रणव चौधरी, बहू मणिका चौधरी और पूनम चौधरी काफी शोकाकुल हैं।

वर्ष 1971 में पाकिस्तान को दिया था मुंहतोड़ जवाब
सेठ एन्क्लेव में रहने वाले कर्नल कुशल कुमार चौधरी वर्ष 1970 में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर सिख रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। एक साल बाद ही पाकिस्तान से जंग छिड़ गई। केके चौधरी उस वक्त अमृतसर सीमा पर प्लाटून के साथ पोस्ट पर थे। तभी पाकिस्तान की कंपनी के सौ-डेढ़ सौ जवानों ने हमला कर दिया। केके चौधरी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। पाक सैनिक जब पोस्ट के बेहद करीब आ गए तो केके चौधरी ने खुद लाइट मशीन गन लेकर आगे बढ़कर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। तब दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो गया था। दुश्मनों ने दूसरी ओर से हमला करने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी केके चौधरी ने मशीनगन की फायरिंग से उनको रोक दिया। सिर्फ एक एलएमजी से केके चौधरी ने पाकिस्तानी सेना की पूरी कंपनी को पीछे ढकेल कर अपनी पोस्ट की रक्षा की। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।

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