PMKVY- पीएम कौशल विकास योजना से 1.64 करोड़ युवाओं को मिली ट्रेनिंग, 94% कंपनियां नौकरियां देने को तैयार

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केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत देशभर में अब तक 1.64 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण या ओरिएंटेशन दिया जा चुका है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री बी एल वर्मा ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी।

यह योजना वर्ष 2015 से कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान कर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना है। वर्तमान में योजना का पीएमकेवीवाई 4.0 संस्करण लागू है। 

इन सेक्टरों में लाखों युवाओं को मिला प्रशिक्षण

8 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है:

  • कंस्ट्रक्शन (Construction): 66,982
  • टेलीकॉम (Telecom): 1,27,106
  • हेल्थकेयर (Healthcare): 1,16,776
  • करियर व एजुकेशन काउंसलर: 4,150

इन चार प्रमुख क्षेत्रों में कुल 3,15,014 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।

रिपोर्ट में सामने आए सकारात्मक परिणाम

नीति आयोग की ओर से अक्तूबर 2025 में किए गए मूल्यांकन के अनुसार, 94% नियोक्ता पीएमकेवीवाई से प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी देने के इच्छुक हैं। वहीं, लगभग 52% उम्मीदवारों ने बताया कि उन्हें या तो बेहतर वेतन मिला है या भविष्य में आय बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा,

  • भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार 70.5% उम्मीदवार अपने पसंदीदा सेक्टर में प्लेस हुए।
  • अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान के अध्ययन में पाया गया कि 70% प्रशिक्षुओं को रोजगार, कौशल या आत्मविश्वास में लाभ मिला।
  • रिकॉग्निशन ऑफ प्रायोर लर्निंग (RPL) के तहत 79% उम्मीदवारों ने सर्टिफिकेशन से फायदा बताया।
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आदिवासी युवाओं को भी मिला लाभ

सरकार के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक 8 लाख से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के युवाओं को भी इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया है।

योजना का उद्देश्य और संचालन

पीएमकेवीवाई 4.0 को वित्त वर्ष 2022-23 से स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत लागू किया गया है। इसके अंतर्गत शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (STT) और आरपीएल के जरिए युवाओं को नए कौशल सिखाए जाते हैं या उनके पुराने कौशल को मान्यता दी जाती है। ट्रेनिंग प्रदाताओं को भुगतान सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार किया जाता है, जिन्हें समय-समय पर अपडेट किया जाता है।


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