राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत में बृहस्पतिवार (13 अगस्त) से आरोपों पर दलीलें शुरू होने की संभावना है। यह मामला सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।
सीबीआई ने 13 मई को राजस्थान में मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवल को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल से 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए लीक पीडीएफ मिलने की बात सामने आई। इसी दिन गुरुग्राम के यश यादव, नासिक के शुभम खैरनार और पुणे के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया। लोखंडे पर सबूत मिटाने के लिए मोबाइल नष्ट करने की कोशिश का आरोप है।
डिलीट चैट और लीक प्रश्नपत्र वाले पीडीएफ से साजिश के सबूत मिले
सीबीआई के मुताबिक मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग में डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और लीक प्रश्नों वाले पीडीएफ बरामद हुए। एजेंसी ने जब्त डिजिटल व संचार उपकरणों तथा दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया।
सीबीआई ने चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक वस्तुओं को साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। उच्च शिक्षा विभाग की 12 मई की लिखित शिकायत पर उसी दिन एफआईआर दर्ज की गई। जांच के लिए 72 अधिकारियों-कर्मियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें बनाई गईं। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई।






