बागेश्वर जिले के जैसर और सिमार गांव में इन दिनों पशुओं में फैल रही सर्रा बीमारी से पशुपालक महिलाएं परेशान हैं। तड़के उठकर खेतों से चारा पत्ती लाने समेत पशुओं की सेवा करने वाली महिलाओं का पूरा समय बीमार मवेशियों की तीमारदारी में बीत रहा है। दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों की आर्थिकी भी प्रभावित हो रही है।
हम महिलाओं के लिए मवेशी सिर्फ पशु नहीं, परिवार के सदस्य जैसे हैं। अब पशु बीमार हैं तो रसोई चलाने से लेकर बच्चों की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है। – चंपा देवी, पशुपालक
रात-दिन बीमार बेजुबान को दर्द में तड़पते देखना बहुत भारी पड़ता है। समय पर दवा दे रहे हैं, काढ़ा पिला रहे हैं। अगर मवेशी नहीं रहे तो हम ग्रामीण महिलाओं की जमापूंजी और मेहनत सब बेकार चली जाएगी।
– देवकी देवी, पशुपालक
संक्रमण फैलने के डर से मवेशियों को चराने के लिए जंगल या खेतों की तरफ भी नहीं ले जा पा रहे हैं। दिनभर उन्हें गोशाला में ही रखना पड़ रहा है। -सरुली देवी, पशुपालक




