ऑपरेशन टाइगर- शिवसेना सिर्फ एक ही हो सकती है’, ऑपरेशन टाइगर विवाद के बीच जनता की अदालत में पहुंचे उद्धव

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सांसदों के हालिया दलबदल से परेशान शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि शिवसेना केवल एक ही हो सकती है, क्योंकि पार्टी की राजनीतिक विरासत मराठी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। रविवार को उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘शिवसेना की राजनीतिक विरासत मराठी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है और शिवसेना केवल एक ही हो सकती है। साल 2024 में हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ा और जनता के समर्थन से जीत भी हासिल की। अब सत्ता और धन के लालच में ये सांसद पार्टी और जनता दोनों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

 

जनता के सामने रखेंगे अपनी बात
रविवार शाम उद्धव ठाकरे ने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की। इस सीट का प्रतिनिधित्व दलबदल कर चुके सांसद संजय दिना पाटिल कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस कदम के जरिए उद्धव ठाकरे अपने वोटबैंक को एकजुट रखना चाहते हैं और दलबदल करने वाले सांसदों को कटघरे में खड़े करना चाहते हैं।

 

शिवसेना यूबीटी में बगावत से बढ़ा संकट

    • शिवसेना यूबीटी के भीतर बगावत ने ठाकरे गुट को गंभीर संकट में डाल दिया है। पार्टी के छह बागी सांसदों में से दो ने रविवार को औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की घोषणा कर दी। इसे शिवसेना यूबीटी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे चार अन्य सांसदों के भी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने का रास्ता खुल सकता है।
    • धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने पार्टी छोड़ने का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब कुछ दिन पहले उन्होंने संकेत दिया था कि वे अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के फैसले के बाद अंतिम फैसला लेंगे। वहीं हिंगोली के सांसद नागेश अष्टीकर ने फेसबुक लाइव के जरिए अपने दलबदल की घोषणा की।
  • शनिवार को सत्र न्यायालय ने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने ओमराजे निंबालकर को पार्टी में बनाए रखने के लिए अंतिम प्रयास भी किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
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‘ऑपरेशन टाइगर’ और शिवसेना यूबीटी में टूट

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव गुट को बड़ा झटका देने की रणनीति बनाई थी। हालांकि जब संसद में परिसीमन विधेयक पारित नहीं हो पाया, उसके बाद इस योजना को ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम देकर अमल में लाया गया।
  • सूत्रों के अनुसार, शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उनके बेटे और कल्याण लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए भाजपा नेतृत्व को यह भरोसा दिलाया कि शिवसेना यूबीटी के सांसदों को अपने पाले में लाकर पार्टी अपनी संख्या बढ़ा सकती है।

बीएमसी में भी ऑपरेशन टाइगर की चर्चा
बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, शिवसेना यूबीटी में बड़े स्तर पर टूट कराने की कोशिश में है। इसके तहत बीएमसी में भी ऑपरेशन टाइगर चलाए जाने की चर्चा है। पार्टी का दावा है कि शिवसेना यूबीटी के करीब 45 कॉरपोरेटर, शिंदे गुट में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। यह संख्या दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से अधिक है। बीएमसी में शिवसेना के नेता अमेय घोले ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा, ‘कम से कम 45 कॉरपोरेटर हमारे साथ आने के इच्छुक हैं। 45 का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कुल संख्या का दो-तिहाई हिस्सा बनता है। संजय राउत ने सांसदों के दलबदल की खबरों को भी अफवाह बताया था, लेकिन आखिरकार वही हुआ।


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