खबर अपडेट- ऊधमसिंह नगर: तो हादसे के लिए जख्मी हाथी को ही जिम्मेदार ठहरा रहा रेलवे, अधिकारी ने कहा- गजराज की गलती

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गुलरभोज-लालकुंआ रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर घायल हुआ हाथी अब भी तड़प रहा है। उसके उपचार के लिए मथुरा से पहुंची विशेष टीम उसे लगातार राहत देने की कोशिश में जुटी है। रेलवे के अधिकारी इस घटना के बाद किसी तरह की विभागीय जांच नहीं कराने की बात कह रहा है। अधिकारी इस घटना का जिम्मेदार बेजुबान हाथी को ही मान रहे हैं। उनका कहना है कि हाथी के अचानक ट्रेन के सामने आ जाने से यह हादसा हुआ। वहीं, पशुप्रेमी इस घटना का असली दोषी रेलवे को ही ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि रेलवे की लापरवाही और संवेदनहीनता के चलते हाथी जख्मी हुआ है। पशु प्रेमियों ने हाथी के साथ हुई घटना की भी प्रभावी जांच की मांग की है।

रेलवे ट्रैक पर 30 किमी प्रति घंटा की गति निर्धारित है। सवाल उठ रहा है कि यदि ट्रेन की गति सामान्य थी तो तो लोको पायलट ब्रेक क्यों नहीं लगा पाया? रेलवे का कहना है कि लालकुआं तक वन क्षेत्रों में पटरी के दोनों ओर जगह-जगह चेतावनी और सावधानी के बोर्ड लगाए गए हैं ताकि लोको पायलट ट्रेन की गति को नियंत्रित रखें।

शनिवार को भी रेलवे के पोल संख्या 16/8 तिलपुर गांव के पास पीपल पड़ाव रेंज से गुजर रही स्पेशल ट्रेन की स्पीड तेज थी जिस कारण बेजुबान हाथी की जान पर बन आई थी। वन क्षेत्र के संवेदनशील क्षेत्रों में रेलवे की ओर से बाकायदा बेरिकेडिंग एरिया तैयार कराना चाहिए ताकि इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो।

वन क्षेत्र में रेल मार्ग के दोनों ओर सावधानी और चेतावनी के बोर्ड लगे हैं। यह घटना हाथी के अचानक ट्रेन के सामने आने के कारण हुई। इस तरह की घटना न हो इसके लिए समय-समय पर वन विभाग के साथ भी समन्वय स्थापित कर रुपरेखा तैयार की जाती है। – संजीव शर्मा, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, इज्जत नगर मंडल

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