कूनो में एक और झटका- भारत में जन्मी मादा चीता KGP-11 की मौत, इलाज के दौरान दम तोड़ा संख्या घटकर 49

Spread the love

कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को एक और बड़ा झटका लगा है। 27 महीने की भारतीय-जनित मादा चीता KGP11 की उपचार के दौरान मौत हो गई। चीता प्रोजेक्ट की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट में इसकी पुष्टि की गई है।

 

जानकारी के अनुसार, 1 जून की सुबह मॉनिटरिंग टीम को रेडियो कॉलर के सिग्नल से केजीपी-11 की लोकेशन पहाड़गढ़ के घने जंगल में मिली। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि मादा चीता के शरीर पर गहरे जख्म थे और वह चलने में असमर्थ थी। वन विभाग की टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे कूनो के पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया था। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ ने उसके इलाज के लिए लगातार प्रयास किए। पालपुर स्थित वन्यजीव अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने उसका परीक्षण किया परीक्षण में आंतरिक रक्तस्राव मिला। लगातार ड्रिप, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं दी गईं। लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

 

क्या रही चीते की मौत की वजह?

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मादा चीता की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए 7 जून को पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उसे चोट कैसे लगी और मौत की मुख्य वजह क्या रही। विशेषज्ञों की मानें तो खुले जंगल में दूसरी पीढ़ी के चीतों को सर्वाइव करना चुनौती है। उन्हें शिकार करना, इलाका बनाना और बड़े परभक्षियों से बचना सीखना पड़ता है। केजीपी-11 अभी पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं थी। संभव है कि वह शिकार के चक्कर में तेंदुए के इलाके में चली गई हो।

और पढ़े  उत्तर रेलवे: तीन साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनें रद्द, रक्षा बंधन पर दिल्ली से कई शहरों के लिए चलेंगी विशेष गाड़ियां

 

25 दिनों में कितने चीतों की मौत?

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केजीपी-11 नर चीता पावक और मादा चीता गामिनी की संतान थी। वह भारत की धरती पर जन्मी दूसरी पीढ़ी की चीता थी। उसकी मौत से परियोजना को बड़ा झटका लगा है। पिछले 25 दिनों में कूनो ने भारत में जन्मे पांच चीतों को खो दिया है। इससे पहले 12 मई को केजीपी-12 के चार नवजात शावकों की मौत हो चुकी है।

 

देश में अब कितने चीते बचे?

इस घटना के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 49 रह गई है। इनमें 32 भारतीय-जनित चीते शामिल हैं। वर्तमान में 19 चीते जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वहीं, पूरे देश में चीतों की कुल संख्या अब 52 बताई जा रही है, जिनमें गांधीसागर क्षेत्र के 3 चीते भी शामिल हैं। KGP11 की मौत ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ वर्षों में कूनो में कई चीतों की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरी ओर भारतीय धरती पर जन्मे शावकों की संख्या बढ़ने को परियोजना की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

 

आखिर क्यों हुई चीते की मौत?

वन विभाग ने कहा है कि घायल होने की परिस्थितियों और मौत के कारणों की जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और आवश्यक संरक्षण उपाय तय किए जाएंगे। कूनो में चीतों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन KGP11 की मौत ने यह भी संकेत दिया है कि खुले जंगल में चीतों के सामने अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। यह घटना चीता परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा का विषय बन सकती है।

और पढ़े  बंगाल- सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक: 72 घंटे का नियम

Spread the love
  • Related Posts

    नेपाल बाढ़ से तबाही: 105 भारतीयों समेत 291 विदेशी पर्यटक लापता,7 की मौत, कई गांव तबाह

    Spread the love

    Spread the loveउत्तरी नेपाल की भोटे कोशी नदी में बुधवार को अचानक बाढ़ आ गई। जिसमें सात लोगों की शव मिले हैं। वहीं, 384 यात्रियों लापता है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक…


    Spread the love

    टीएमसी के बागी सांसदों की बढ़ीं मुश्किलें, लोकसभा सचिवालय ने भेजा नोटिस

    Spread the love

    Spread the loveलोकसभा सचिवालय ने TMC के 20 बागी सांसदों को अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस भेजकर सात दिनों में जवाब मांगा है। इन सांसदों…


    Spread the love