अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने नया दंड संहिता लागू किया है। इस कानून पर जनवरी में वहां के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हस्ताक्षर किए थे। इस नए कानून में कुल 119 धाराएं हैं और इसमें कई ऐसे प्रावधान हैं, जिन पर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
पत्नी को पीटने पर सिर्फ 15 दिन की सजा
सबसे बड़ी बात यह है कि इस कानून में पत्नी को पीटने पर सजा सिर्फ 15 दिन की जेल रखी गई है, वह भी तब जब पत्नी अदालत में साबित कर दे कि उसे चोट लगी है और शरीर पर कट, घाव या नीला निशान दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, अगर कोई महिला अपने पति की अनुमति के बिना अपने मायके चली जाती है और वहां रुकती है, तो उसे तीन महीने की जेल हो सकती है। इतना ही नहीं, अगर उसके मायके वाले उसे वापस पति के पास नहीं भेजते, तो उन्हें भी सजा दी जा सकती है।
यह कानून अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ- तुर्क
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और महिलाओं के साथ भेदभाव को कानूनी रूप देता है। यूएन वुमेन की प्रतिनिधि सुसान फर्ग्यूसन ने भी कहा कि इस कानून से पुरुषों को महिलाओं पर अधिकार की स्थिति में रखा गया है और महिलाओं के लिए न्याय पाना और मुश्किल हो जाएगा। इस कानून में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि जानवरों को लड़ाने पर पांच महीने तक की जेल हो सकती है। अफगानिस्तान में मुर्गों और तीतरों की लड़ाई एक आम परंपरा रही है, लेकिन तालिबान ने 2021 में सत्ता में आने के बाद इस पर रोक लगा दी थी। अब नए कानून में जानवरों की लड़ाई की सजा पत्नी को गंभीर रूप से पीटने की सजा से कहीं ज्यादा है।
एक ही अपराध के लिए अलग सजा
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक ही अपराध के लिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लोगों को अलग सजा दी जाएगी। धार्मिक विद्वानों और बड़े लोगों को सिर्फ चेतावनी दी जा सकती है, जबकि आम लोगों को जेल और निचले वर्ग के लोगों को शारीरिक सजा दी जा सकती है। हालांकि हत्या के मामलों में यह फर्क नहीं होगा और दोषी पाए जाने पर मौत की सजा दी जा सकती है। पैगंबर मोहम्मद का अपमान भी मौत की सजा वाला अपराध है, हालांकि पश्चाताप करने पर इसे छह साल की जेल में बदला जा सकता है।







