नेपाल जलप्रलय: दो मासूम चार दिन बाद लौटे, मां भूली आशियाना उजड़ने का दर्द, एक घर में मिले 24 शव

नेपाल के देवीघाट में जब जलप्रलय आया तो एक घर ऐसा भी था जिसकी चौखट से दो मासूम पढ़ने के लिए स्कूल गए थे। पुल टूटकर बहने से संपर्क कट गया और मोबाइल फोन का नेटवर्क ध्वस्त हो गया। चार दिन बाद सेना की मदद से वापस घर आए तो पूरी बस्ती उजड़ चुकी थी और घर गायब था।

मां और बहन ने जब उन्हें देखा तो घर बह जाने का गम कुछ पल के लिए पीछे छूट गया और दोनों मासूमों को सीने से लगाकर फफक पड़ीं। देवीघाट के बाजार में रहने वाली अनीता सानी मंगलवार को अपने बच्चों को लेकर जब उजड़े घर के पास पहुंचीं तो उनकी आंखें बार-बार उस जगह को तलाश रही थीं, जहां कभी उनका परिवार रहता था। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चे नदी के दूसरी ओर स्थित स्कूल गए थे।
चुनौतियों के बीच डटी है भारतीय टीम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम काठमांडो में काम शुरू कर चुकी है। वहीं, सुरंग बचाव दल भी चुनौतियों के बावजूद डटा है।

नेपाल में एक ही घर में मलबे में दबे 24 शवों को देखकर बचाव कर्मियों का भी कलेजा कांप गया। ये शव नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका इलाके में मिले हैं।
नुवाकोट के पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी ने बताया कि बिदुर के बेत्राबती में जहां एक जगह 24 शव मिले हैं, उसके बारे में यह पता नहीं चल पाया है कि उसका मालिक कौन था। यह घर होटल या गेस्टहाउस जैसा लग रहा है। 

  • इस इलाके में बचाव दल अब भी मलबे के नीचे दबे लोगों को तलाशने में जुटे हैं।
  • नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें बाढ़ प्रभावित अन्य क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
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रसुवा जिले में बचाव दल ने डेढ़ माह की एक बच्ची को सुरक्षित निकाल लिया है। धुन्चे कैंप पहुंचाई गई बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। नेपाली सेना के जवान मासूम को पारंपरिक टोकरी में बेहद सावधानी से ले जाते दिख रहे हैं।

मौत के मुंह से लौटे… सुरंग से बाहर निकले 23 मजदूर परिवाराें से मिले
भोटेकोशी की बाढ़ में फंसे बरबारदिया के 23 मजदूर पांच दिन बाद अपने परिवारों के पास वापस लौट आए। हालांकि, घर लौटने से उनके परिवार खुश हैं लेकिन बारदिया के 78 लोगों का अभी कोई पता नहीं है।

एक मजदूर कृष्णा प्रसाद श्रावण ने बताया कि वह रसुवा के मैलुंग में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर में काम करने गए थे। हमारी टीम से 50 मीटर दूर एक और ग्रुप काम कर रहा था। सुबह 9:30 बजे टनल के बाहर मौजूद एक चीनी कर्मचारी ने टीम लीडर को वॉकी-टॉकी से बाढ़ के बारे में बताया। थोड़ी देर में कंपनी की एक गाड़ी से हम टनल से निकले। इतने में वहां बहुत बड़ा सैलाब घुस आया। हमने घास को पकड़कर चट्टान पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

नेपाल ने मांगा जलवायु मुआवजा, कहा- ये जिम्मेदारी
नेपाल ने जलवायु संबंधी मुआवजा हासिल करने की कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने आरोप लगाया कि चीन, अमेरिका और भारत दुनिया में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करने वाले तीन सबसे बड़े देश हैं। जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भरपाई करना इन देशों की जिम्मेदारी है।

 

प्रिया ने 100 से ज्यादा उड़ानें भर बचाईं कई जानें
नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट प्रिया अधिकारी एक हफ्ते में 100 से ज्यादा उड़ानें भर चुकी हैं। हर उड़ान के बाद जब वह किसी जीवित बचे व्यक्ति से मिलती हैं, तो जो खुशी और राहत मिलती है, उससे दिनभर की थकान और डर मिट जाता है।

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ग्रीन हाउस: आपदा में बना मजबूती की मिसाल
त्रासदी के बीच हरे रंग का एक घर सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियों में रहा, जिसमें बाल्कनी में नजर आ रहे लोगों को बाद में सुरक्षित निकाल लिया गया था। यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि 40 साल पुराना यह घर काफी मजबूत होने के कारण उनकी जान बच गई। घर की मालकिन लक्ष्मी पांडेय ने कहा, हमें दूसरा जन्म मिला है।

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