नैनीताल- चारा लेने जंगल गई महिला की वन्यजीव के हमले में मौत, बाघ के हमले की आशंका

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ज्योलीकोट-नैनीताल डिविजन में वन्यजीवों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीते चार माह में प्रभाग में वन्य जीवों के हमले से पांच महिलाओं की मौत के बाद बुधवार को एक और घटना घटित हुई। शहर के समीप ज्योली क्षेत्र में वन्य जीव ने एक महिला को निवाला बना दिया। जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों में भय का माहौल है। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम का घेराव किया और शव को लेकर सड़क पर बैठ गए। ग्रामीणों ने आदमखोर बन चुके वन्य जीव को गोली मारने की मांग की है।

 

ग्राम प्रधान शेखर चन्द्र भट्ट के अनुसार बुधवार को 50 वर्षीय हेमा पांडे रोज की तरह अन्य दो महिलाओं के साथ जंगल घास लेने गई थी। दोनों महिलाओं की घास जल्दी कट जाने पर हेमा ने उनको जाने को बोला। दोनों महिलाएं वापस घर आ गई। लेकिन देर तक महिला के घर नहीं आने पर महिला की खोजबीन शुरू हुई। खोजबीन में जंगल में महिला की साड़ी मिली तो ग्रामीणों डर गए और आगे खोजबीन की। लगभग एक किलोमीटर आगे महिला का आधा खाया हुआ शव मिला। जिससे वन्यजीव के हमले की पुष्टि हुई। ग्रामीणों ने वन विभाग को घटना की सूचना दी। सूचना के बाद मौके पर वन विभाग की टीम पहुंची तो गुस्साए ग्रामीणों ने उन्हें शव नहीं हटाने दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को घेर लिए। बाद में शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने महिला को मारने वाले जंगली जानवर को गोली मारने पर ही मौके से हटने की बात कही।

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इस घटना के बाद ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसरा है। जंगल अब लोगों के लिए जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि मौत का खतरा बनते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र के चोपड़ा व अन्य क्षेत्रों में पहले भी इस तरह के कई हमले हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों में लंबे समय से भय बना हुआ है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाने से लोगों में आक्रोश भी पनप रहा है। डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि मामले में हमला करने वाला जानवर बाघ है या तेंदुआ इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। बताया कि जंगल में तेंदुए के पैरों के निशान हैं लेकिन बाघ के खोज नहीं मिल पाए हैं। इससे अभी हमलावर जानवर का पता लगा पाना मुश्किल है। लेकिन क्षेत्र में लगातार गश्त कर नजर रखी जा रही है।

घटना के बाद ब्लाक प्रमुख डॉ हरीश बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य हिमांशु पांडे, ग्राम प्रधान शेखर चन्द्र भट्ट, हंशी तिवारी, पूर्व ग्राम प्रधान सूर्याजाला राजेन्द्र सजवान, कैलाश जीना व सामाजिक कार्यकर्ता कमल जंतवाल व अन्य ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने कहा कि अपने घर की रीढ़ थी हेमा
ग्रामीणों ने बताया कि हेमा पांडे अपने परिवार की रीढ़ थी। हेमा पशुपालन व खेती कर अपना घर चलाती थी। हेमा का पति भुजियाघाट क्षेत्र में दुकान में काम करता है। दोनों मिलकर अपने दोनों बच्चों बड़ी बेटी को एमएससी व छोटे बेटे को कालाढूंगी से आईटीआई करा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि जानवर ज्यादा होने के चलते महिला ने सुबह ही अपनी एक गाय बेची थी। हेमा की मौत के बाद पति गुम व बच्चों का रो रो कर बुरा हाल है।

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सिलिंडर न मिलने पर, जंगल की दौड़ ने ली महिला की जान
ग्रामीण हंशी जोशी ने बताया कि आसपास के क्षेत्रों में पहले से कई घटनाएं हो चुकी हैं। अब इस घटना ने ग्रामीणों को अंदर झंकझोर दिया है। कहा कि गैस सिलिंडर मार्च 31 को मिले थे जो खत्म होने की कगार में हैं। ना चाहते हुए भी घास ईधन के लिए उन्हें जंगल जाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वन्यजीव मानव संघर्ष को रोकने के लिए ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराई जाए।


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