नैनीताल शहर के जिला न्यायालय परिसर से लगी पार्किंग में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई जब निजी कार के अंदर एक नोटरी अधिवक्ता अधिवक्ता का शव पड़ा मिला। मौके पर अधिवक्ता के कान से सटाकर गोली मारने, हाथ में रिवाॅल्वर और कार के डैशबोर्ड पर सुसाइड नोट मिलने से पुलिस प्रथमदृष्टया इसे आत्महत्या मान रही है। मौके पर मिले सुबूत और फारेंसिंक पड़ताल के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
डायल 112 और फोन के माध्यम से पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि कलेक्ट्रेट पार्किंग स्थल पर किसी अधिवक्ता ने स्वयं को गोली मार ली है। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच की तो अधिवक्ता की मौत हो चुकी थी। क्राइम सीन बनने के कारण फोरेंसिक टीम बुलाई गई। टीम ने नमूने इकट्ठा किए हैं। पुलिस की ओर से जांच और पूछताछ की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शव का होल बॉडी एक्सरे भी कराया जा रहा है।-डॉ. मंजूनाथ टीसी, एसएसपी, नैनीताल
कार के डैशबोर्ड पर मिला सुसाइड नोट
कार के डैशबोर्ड पर मिले सुसाइड नोट में उन्होंने जिंदगी से परेशान होने की बात कही है। अन्य बातों से भी साफ हो रहा है कि उन्होंने परेशान होकर आत्म हत्या कर ली है। पर सवाल उठ रहा है कि अधिवक्ता किस मानसिक दबाव में थे? वहीं गोली लगने के बाद भी अधिवक्ता का शव पीछे की सीट पर बैठी स्थिति में मिला जबकि सुसाइड नोट कार के डैशबोर्ड पर रखा मिला है। कार के शीशे आधे खुले हुए थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या है या फिर मामला संदिग्ध है।
टीम ने जुटाए साक्ष्य
घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने कार और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटाए हैं और कई अहम नमूने एकत्र किए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी गई है। कोर्ट परिसर के पास हुई इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर किस हालात ने एक अनुभवी अधिवक्ता को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
20 साल का अनुभव, 15 साल से नोटरी, जाने-माने अधिवक्ता थे भाकुनी
अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी करीब दो दशक से न्यायालय में सक्रिय रूप से वकालत कर रहे थे। कानूनी मामलों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी और वे अपने पेशे में एक अनुभवी चेहरा थे। बीते लगभग 15 वर्षों से वह नोटरी वकील के रूप में भी कार्यरत थे। वह नैनीताल समेत कोश्या कुटौली में नोटरी कार्य करते थे। स्थानीय अधिवक्ताओं और आम लोगों के बीच उनकी एक सुलझे और व्यवहारिक व्यक्ति के रूप में पहचान थी। इस घटना से अधिवक्ता वर्ग हैरान है।







