नैनीताल हाईकोर्ट- बाढ़ में बहा प्लॉट, भूमि देने में देरी पर HC सख्त, राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर जताई नाराजगी

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शर्मिला जोशी बनाम पुनर्वास निदेशक मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी जताई है। मामला वर्ष 2017 की बाढ़ में बह चुके आवंटित प्लॉट के बदले वैकल्पिक भूखंड देने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता शर्मिला जोशी की ओर से बताया गया कि उनकी माता स्वर्गीय प्रेमकांता नौटियाल को 24 जुलाई 2017 को देहरादून के भनियावाला क्षेत्र, झाखन नदी के पास एक प्लॉट आवंटित किया गया था। लेकिन महज तीन महीने बाद ही वर्ष 2017 की बाढ़ में वह प्लॉट पूरी तरह बह गया। याचिकाकर्ता की माता ने उक्त प्लॉट के बदले दूसरा प्लॉट देने के लिए राज्य सरकार से आवेदन किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में याचिकाकर्ता ने स्वयं को एकमात्र वैध उत्तराधिकारी बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की।

 

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि संबंधित विभाग के अधिकारियों ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा था कि इस स्थिति में नया प्लॉट दिया जा सकता है। इसके विपरीत, राज्य सरकार की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट में कहा गया कि एक बार प्लॉट आवंटित हो जाने के बाद किसी भी स्थिति में दूसरा प्लॉट नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने राज्य के इस रुख को असंगत और विभागीय पत्र के विपरीत बताया। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे स्पष्ट निर्देश लेकर बताएं कि याचिकाकर्ता को वैकल्पिक प्लॉट कब तक दिया जा सकता है।

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