शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपए था, वहीं दस्तावेजों में महज 18.20 लाख रुपये दर्शाए गए। वही मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और फिर कटनी जिले में FIR दर्ज कराई गई। जिसमें आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित कर एएसपी अंजना तिवारी को इसकी जिम्मेदारी दी गई। जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7(सी), 12 और 13 भी जोड़ी गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
दूसरी कहानी तृप्ति सिंह राजपूत की
फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को सरकारी नौकरी और सरकारी संपत्ति दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत इन दिनों अशोकनगर जेल में बंद हैं। तृप्ति पर चंदेरी में चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई को गिरफ्तार किया है। जांच में कथित फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज, सीबीआई लिखा पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड और ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा कार मिलने की बात भी सामने आई है।


चार साल पहले भी आया था श्वेता का नाम
चार साल पहले सामने आए चर्चित हनीट्रैप मामले में भी श्वेता जैन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस जांच में आरोप लगा था कि श्वेता ने अपने संपर्क में आई आरती दयाल को गिरोह में शामिल किया और उसके जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को हनीट्रैप में फंसाया गया। बताया गया कि हरभजन सिंह ने आरती के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया था। आरोप है कि वहां उनका वीडियो बनाया गया और बाद में पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इसके बाद हरभजन सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उस समय पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। यह मामला पूरे प्रदेश में काफी चर्चित रहा था। बाद में डेढ़ साल पहले हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे।








