इस बार मानसून का मिजाज बदला-बदला है। इसकी असली कहानी केवल इस बात से नहीं समझी जा सकती कि देश में कितनी बारिश हुई। इस बार बारिश कब, कहां और कितनी तेज हुई, यह ज्यादा बड़ा सवाल बन गया है।
देश का औसत आंकड़ा जमीन पर पैदा होने वाली परेशानी की पूरी तस्वीर नहीं बताता। मसलन, किसी इलाके में पूरे महीने बारिश कम रही। लेकिन दो-तीन दिनों में बहुत तेज बारिश से ही खेतों में पानी भर गया। शहरों में नाले उफनाने लगे। पहाड़ों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। 18 अगस्त को उत्तराखंड, गांगेय क्षेत्र पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।
10 साल में अगस्त कभी सूखा, कभी लबालब
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│ वर्ष │ बारिश │ सामान्य से │
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│ 2016 │ 238.4 │ 6.8% कम │
│ 2017 │ 228 │ 13% कम │
│ 2018 │ 241.4 │ 8% कम │
│ 2019 │ 00 │ 15% ज्यादा │
│ 2020 │ 327 │ 27% ज्यादा │
│ 2021 │ 195.9 │ 24% कम │
│ 2022 │ 263.7 │ 3% ज्यादा │
│ 2023 │ 162.7 │ 36% कम │
│ 2024 │ 293.9 │ 15% ज्यादा │
│ 2025 │ 268.1 │ 5% ज्यादा │
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आईएमडी के 1971–2020 के औसत के मुताबिक अगस्त में देश में 254.9 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। इसी सामान्य आंकड़े से हर साल की वास्तविक बारिश की तुलना कर यह तय किया जाता है कि बारिश सामान्य से कम रही या ज्यादा।





