मोहन भागवत: हिंदू धर्म में जो लोग लौटें हमें उनका ख्याल रखना होगा, तेज होना चाहिए घर वापसी का काम

हिंदू समाज को किसी से भी खतरा नहीं है, लेकिन हमको सावधान रहना होगा। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कही। वह निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा।

बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उन्होंने कहा एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा। इस बैठक में सिक्ख,बौद्ध,जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम, ब्रह्म विद्या निकेतन, सहित अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

अबला नहीं असुर मर्दिनी है भारतीय नारी

सरसंघचालक ने कहा कि घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह माताएं तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। महिला को हमें अबला नहीं मानना है, वह असुर मर्दिनी है।

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जातियां झगड़े का न बने कारण

यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी।

विदेशी शक्तियों के प्रति चेताया
उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा।

कानून सभी को मानना है 
यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए।

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