रामनगरी में राम जन्मभूमि आंदोलन में शहीद हुए कारसेवकों का मनाया गया 34 वां बरसी शहीद दिवस

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रामनगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन में शहीद हुए कारसेवकों का 34 वां बरसी शहीद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। लेकिन राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद हो रहे भव्य मंदिर निर्माण उत्साह में अब अयोध्या के लोग ही नहीं बल्कि साधु संत भी इस मंदिर के लिए अपने प्राणों की बलिदान देने वाली कारसेवकों को भूलते जा रहे है। आज अयोध्या के दिगंबर अखाड़ा स्थित शहीदों की याद में बने स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए चंद लोग ही दिखाई दिए।विश्व हिंदू परिषद प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को कभी भुलाया नहीं जा सकता आज हम लोगों का सौभाग्य की उन वीर शहीद कारसेवकों के चरणों में श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित हुए हैं या वही अच्छा लग रहा पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित हुआ करते थे और अपनी भावनाओं को भावांजलि के रूप में व्यक्त करते थे आज या देखकर काफी दुख होता है जो हम देख रहे हैं आज यहां कितने लोग हैं रंगीला शहीदों को श्रद्धांजलि देने की एक व्यक्ति भी दे सकता है और 1 लाख लोग भी दे सकते हैं लेकिन हमारी भावना उनके प्रति समर्पित है वह लोग आज हम लोगों के बीच में नहीं हैं 1990 के घटना के बाद लगातार हम लोग यहां पर उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं आज जो सपने साकार रूप ले रहा है वह उनके ही कारण है। अगर वह लोग नहीं होते तो हो सकता किया सपने साकार नहीं हो पाता। हम लोगों से अपील करते हैं इन बड़ी गाड़ियों को लोग भूले ना उन्हें याद करते रहें अगर आज हम इन्हें भूल गए तो अपने इतिहास से विमुख हो जाएंगे। आवाज जो भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है वह इन्हीं बलिदानी कारसेवकों के कारण हुआ है यदि आज राम मंदिर आंदोलन ना होता और लोग शहीद ना हुए होते तो हो सकता है कि लोगों को मालूम ही ना होता श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में है।बता दे 2 नवंबर 1990 में रामजन्मभूमि पर भगवा लहराने अयोध्या पहुंचे बड़ी संख्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचें पर भगवा ध्वज फहराने पहुंचें गए थे। जिसके बाद कारसेवकों की भीड़ को हटाने के लिए तत्कालीन मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोली चलाई गई जिसमें बड़ी संख्या में कारसेवक मारे गए। इस घटना के बाद प्रत्येक वर्ष आज के दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है।

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