7 साल की उम्र में गवाएं दोनों हाथ, मुआवजे की आस में चली गई जान, अब हाईकोर्ट से आया फैसला

फरवरी 1997 में पप्पू सात साल का था। वह घर के बाहर खेल रहा था। बिजली विभाग की ओर से गली में सड़क पर ही ट्रांसफाॅर्मर रखा गया था। इससे पप्पू को करंट लग गया। परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि बेटे का इलाज करा सकें। कर्ज लेकर इलाज कराया। मगर दोनों हाथ कट गए। लापरवाह विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ, मुआवजा भी नहीं मिला। इससे पहले पिता, फिर खुद पप्पू और बाद में मां शांति देवी की भी जान चली गई।

 

यह कहना था करंट से झुलसे पप्पू के भाई प्रमोद और उसकी भाभी मिथिलेश का। प्रमोद मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपील की थी। मुआवजा मिलता तब तक भाई पप्पू की मौत हो गई। उसके गम में मां भी चल बसी। प्रमोद ने बताया कि घर के पास गली में ट्रांसफाॅर्मर था। भाई पप्पू खेलने के लिए गया था। तभी उसके साथ हादसा हो गया। उसके दोनों हाथ काटने पड़ गए।

भाई के साथ हुई घटना के दर्द ने परिवार का सुख चैन छीन लिया। भाई के साथ हुए हादसे के गम में पिता हरी सिंह की मृत्यु हो गई। मां शांति देवी पर ही चार भाइयों की जिम्मेदारी आ गई। वह घरों में काम करके पालन पोषण कर रही थीं। भाई के इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ गया। तब करीब 4 लाख रुपये खर्च हुए थे। अखबारों में खबर आने के बाद परिवार की मदद करने कुछ लोग आए। मगर उससे गुजारा नहीं हुआ। विभाग से मदद तक नहीं मिली। पप्पू को भी एक भाई संभालता था। तब वो खाना और पानी पी पाता था। उसके पास हर पल एक व्यक्ति को देखभाल के लिए रहना पड़ता था।
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हादसे के बाद बिगड़ी थी तबीयत
पप्पू की भाभी मिथिलेश के पति रमेश की 10 साल पहले मृत्यु हो गई थी। मिथिलेश ने बताया कि देवर पप्पू के दोनों हाथ कट गए थे। बड़े होने पर वह घर का गुजारा करने के लिए परिचित और परिवार के लोगों के साथ सब्जी बेचने जाते थे। इससे जो मिलता था, घर और अपना खर्च चलाते थे। मई 2024 में पप्पू की मृत्यु हो गई थी। उन्हें 5 महीने पहले भगवान टॉकीज पर एक वाहन ने टक्कर मार दी थी। उनके हाथ-पैरों में चोट लगी थी। उनका इलाज कराया। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। उनकी हालत बिगड़ गई। इससे उनकी जान चली गई। बेटे की मौत के बाद मां शांति देवी गम में आ गईं। 18 जून 2025 को उनकी मौत हो गई।

भाभी ने कहा, अधिवक्ता से करेंगे बात
भाभी मिथिलेश ने बताया कि कई साल पहले पप्पू ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसके लिए अपने अधिवक्ता की मदद ली थी। तब से पप्पू को मुआवजे की आस थी। मगर अब वो इस दुनिया में नहीं है। मगर वो अधिवक्ता की मदद से मुआवजे की प्रक्रिया को पूरा कराएंगे।

दो साल पहले चली गई थी जान
हाथ गंवाने के बाद मुआवजे के लिए वर्षों संघर्ष करते हुए पप्पू की मई 2024 में माैत हो गई थी। उनके भाई प्रमोद ने बताया कि पप्पू एक हादसे में घायल हो गए थे। तब से बीमार रहने लगे थे। दो साल पहले वह दुनिया छोड़ गए।

उसी स्थान पर है ट्रांसफार्मर
जिस स्थान पर हादसा हुआ था, वर्तमान में उसी स्थान पर ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। हालांकि अब सुरक्षा के इंतजाम पूरे कर दिए गए हैं। ट्रांसफार्मर ऊंचाई पर रखा गया है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रांसफार्मर जमीन पर रखा हुआ था। इस वजह से पप्पू हादसे का शिकार हो गया। वह उस समय सात साल का था। उसे नहीं पता था कि करंट लग जाएगा।
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