उत्तराखंड समेत हिमाचल, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम के पर्वतीय क्षेत्रों में 12 हजार फीट की ऊंचाई तक कुंजा पौधा प्राकृतिक रूप से उगता है। कुंजा में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगस समेत कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसके पत्ते, फूल, जड़ का इस्तेमाल टॉनिक, एंटीस्पास्मोडिक, एंटी माइक्रोबियल व सूजन रोधी के रूप में किया जाता है। इसके अलावा त्वचा संबंधित रोग, कीटों को भगाने, सुगंधित तेल से एरोमा उपचार में प्रयोग होता है।
सगंध फसलों पर शोध
कुंजा की उपयोगिता और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सगंध पौध केंद्र सेलाकुई भाऊवाला एरोमा फार्म में दो नई प्रजातियां विकसित कर रहा है। दोनों प्रजातियों में अलग-अलग औषधीय गुणों की मात्रा का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। शोध में कुंजा तेल में थुजोन की मात्रा 30 से 40 प्रतिशत, आर्टेमिसिया कीटोन की 20 से 30 प्रतिशत, सिनियोल बोर्नियोल की 1.8 प्रतिशत पाया गया। जो जीवाणु व फूंफद फंगस को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं।
सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि राज्य में एरोमा खेती को बढ़ावा देने के लिए संस्थान विभिन्न सगंध फसलों पर शोध कर रहा है। कुंजा की दो नई प्रजाति तैयार की जा रही है। इसके लिए अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। शोध के बाद किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।