किडनी कांड रैकेट: 9.5 लाख में खरीदकर 90 लाख में बेची, डॉक्टर दंपती समेत 10 हिरासत में, कई अस्पताल रडार पर

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कानपुर में किडनी रैकेट मामले में जिन तीन प्राइवेट अस्पतालों का नाम सामने आ रहा है, उनमें से एक के पास रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। पूरा अस्पताल ही अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग को तब हुई जब मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस की टीम के साथ निरीक्षण करने पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मामले में 50 से ज्यादा अस्पताल रडार पर हैं जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त रूप से देर रात तक जांच में जुटी रही।

 

सोमवार को पुलिस की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग से एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी और कल्याणपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह व टीम के अन्य अधिकारियों ने तीनों अस्पतालों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले कई वरिष्ठ डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा सकती है, कुछ चिकित्सक कई बड़ी संस्थाओं से भी जुड़े हैं। एसीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ऐसे डॉक्टरों की भी तलाश कर रही हैं जो सर्जन या नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। सूत्रों के अनुसार मामले में जिन अस्पतालों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके यहां छोटे ऑपरेशन की भी सुविधा नहीं है। इन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाए जाते हैं। चिकित्साधिकारियों के अनुसार ऐसे डॉक्टरों से भी पूछताछ की जाएगी। 

22 साल पहले भी सामने आया था किडनी खरीद का मामला

22 साल पहले भी शहर में किडनी की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था। इसमें पॉश इलाके में स्थित एक नर्सिंग होम और उसमें कार्यरत सर्जन का नाम प्रकाश में आया था। आरोप था कि रैकेट में शामिल आर्थिक रूप से कमजोर या किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने आए मरीज की उसके संबंधित जांचों के साथ की किडनी की भी जांच की जाती थी। जिस मरीज को किडनी की जरूरत होती थी, उससे मैच करने पर किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की जाती थी। मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में सीबीसीआईडी ने इस मामले की जांच की थी। इसमें शामिल सर्जन वर्तमान में भी चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

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दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से आते थे डॉक्टर
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, मुंबई और दिल्ली से स्पेशलिस्ट बुलाए जाते थे। ट्रांसप्लांट की टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजी और ग्राफ्टिंग एक्सपर्ट होते थे। साथ ही एनेस्थेसिस्ट, डायटीशियन भी टीम का हिस्सा होते थे।

इनसे हो रही पूछताछ
किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस ने पांडुनगर निवासी डॉ. इंदरजीत सिंह, उनके भाई सुरजीत सिंह आहूजा, उसकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और एक अन्य युवक से जानकारी जुटाने के लिए सोमवार शाम पूछताछ की है। आहूजा हॉस्पिटल डाॅ. इंदरजीत और उनके परिवार का बताया जा रहा है।

दो महीने पहले बंद हो चुके हॉस्पिटल में भर्ती था डोनर
पुलिस को आवास विकास स्थित आरोही हॉस्पिटल में किडनी डोनर भर्ती मिला है। यह हॉस्पिटल करीब दो माह पहले बंद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मरीज को हॉस्पिटल के संचालक राजेश के कहने पर भर्ती कराया गया था। पुलिस को मौके से मरीज के नाम का हॉस्पिटल वाला पर्चा मिला है। किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने किडनी डोनेट करने वाले और ट्रांसप्लांट कराने वाले की सेहत को देखते हुए उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। देर शाम को एंबुलेंस से पुलिस सुरक्षा में दोनों को अस्पताल भेजा गया था।

छापे के डर से निजी अस्पतालों ने लाइटें की बंद
किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होते ही पुलिस ने इलाके के कई अस्पतालों में दबिश दी। इससे कल्याणपुर में संचालित हो रहे वैध-अवैध अस्पताल के संचालकों में खलबली मच गई। अधिकतर ने बाहर लगे ग्लो साइन बोर्ड से लेकर खिड़कियों तक की लाइटें बंद कर दीं। दूर से देखने में लग रहा था कि अस्पताल में कोई मरीज भर्ती ही नहीं है। तीमारदारों को बाहर निकलने से भी रोका गया था।

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पढ़ें पूरा मामला

कल्याणपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने का मामला प्रकाश में आया है। यहां के एक अस्पताल में उत्तराखंड के युवक से करीब दस लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा हुआ। किडनी निकलवाने के बाद दलाल ने उसे जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया। अवैध तरीके से की गई किडनी की इस खरीद-फरोख्त का सुराग लगने पर सोमवार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में छापा मारा। पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत दस लोगों को हिरासत में लिया है। एक अस्पताल का संबंध आईएमए के एक बड़े पदाधिकारी से बताया जा रहा है।

युवक को छह लाख रुपये नकद और 3.5 लाख का चेक दिया
कल्याणपुर के आवास विकास तीन निवासी शिवम अग्रवाल पर आरोप है कि उसने उत्तराखंड के युवक को दस लाख में किडनी बेचने का ऑफर दिया था। बताया था कि उसके रिश्तेदार को किडनी की जरूरत है। रुपयों की जरूरत के चलते युवक ने हामी भर दी। रावतपुर स्थित एक अस्पताल में किडनी निकाली गई। दलाल शिवम ने इसी अस्पताल में भर्ती मुजफ्फरनगर की महिला मरीज (35) के परिजन को 90 लाख रुपये से अधिक में किडनी बेच दी। सूत्रों के मुताबिक किडनी बेचने वाले युवक को छह लाख रुपये नकद और 3.5 लाख का चेक दिया। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद दोनों मरीजों को 24 घंटे तक इसी अस्पताल में रखा गया। इसके बाद दोनों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया।

तीन अस्पतालों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का छापा
किडनी रैकेट की जांच कर रही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार रात तीन अस्पतालों में छापा मारा। इनमें कल्याणपुर आवास विकास एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, पनकी कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने किडनी संबंधी रोगों के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी जुटाई। छापे की इस कार्रवाई को किडनी रैकेट से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इसमें से कुछ अस्पताल किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में शामिल हो सकते हैं। कोई भी पुलिस अधिकारी खुलकर आरोपियों की गिरफ्तारी या भूमिका के बारे में बोलने से बच रहे हैं।

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50 हजार रुपये न मिलने पर की पुलिस से शिकायत
सूत्रों के अनुसार दस लाख में सौदा तय होने के बाद डोनर को सिर्फ 9.5 लाख रुपये दलाल शिवम ने दिए थे। 50 हजार के लिए शिवम उसे टरका रहा था। इसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस से की। पुलिस ने जांच की तो किडनी रैकेट की परतें खुलती चली गईं। देर रात क्राइम ब्रांच ने युवक के बताए दोनों अस्पतालों में छापा मारा। जांच में वहां उसके भर्ती हाेने के सबूत मिले हैं। क्राइम ब्रांच ने दोनों हॉस्पिटल के संचालक, डॉक्टर दंपती और दलाल शिवम को हिरासत में लिया। वहीं, किडनी लेने वाली मरीज को भी आवास विकास के एक अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था। पुलिस ने उस हॉस्पिटल में भी जांच की। वहां से पांच अन्य लोगों को उठाकर पूछताछ की जा रही है।


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