क्या ईरान पर हमले के लिए तैयार है अमेरिका: कितने हथियार किए तैनात, कैसे हो सकता है पलटवार..

मेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं।

 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है?

पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव?

ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है।

1. परमाणु कार्यक्रम 
अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं।

2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन 
दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके।

3. क्षेत्रीय सुरक्षा 
ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं।

वर्तमान में स्थिति यह है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले के विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि राजनयिक प्रयास अभी भी जारी है।

अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं?

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं।

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1. नौसैनिक बेड़े

विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है।

विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं।

2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान

लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं।

सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं।

ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे।

3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां

हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है।

हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं।

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मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा?

अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी?

अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी
25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से सप्लाई के लिए गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में बाधा आती है तो एशिया के अधिकतर देशों की तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जो कि लंबी अवधि में कई देशों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

इसी कड़ी में एक फरवरी से ईरान ने दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास भी शुरू किया है। इसे होर्मुज जलडमरूमध्य का स्मार्ट नियंत्रण नाम दिया गया। यहां मंगलवार (17 फरवरी) को कुछ समय के लिए होर्मुज को बंद भी रखा गया था।

3. युद्ध की रणनीति
ईरान अपनी पारंपरिक सेना की तुलना में अमेरिका के खिलाफ ‘असममित युद्ध’ की तैयारी कर रहा है। ईरान के पास एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन बेड़ा है, जिनमें से कई को गुफाओं और भूमिगत ठिकानों में छिपाकर रखा गया है। ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए बड़ी संख्या में विस्फोटक ड्रोनों और तेज रफ्तार टॉरपीडो नावों से एक साथ हमला करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इसके अलावा तेल की वैश्विक आपूर्ति रोकने के लिए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाने का विकल्प सुरक्षित रखा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरान इस ओर कदम बढ़ा चुका है या नहीं।

4. क्षेत्रीय युद्ध की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी हमला एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा। ईरान उन देशों के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है, जिन्हें वह अमेरिकी हमले में शामिल या मददगार मानता है, जैसे- इस्राइल या जॉर्डन। इसके अलावा ईरान के सहयोगी जैसे हिज्बुल्ला ने भी कहा है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में आग लगा देगा।

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5. कूटनीतिक मोर्चा
सैन्य तैयारी के साथ-साथ ईरान कूटनीतिक बातचीत में भी शामिल है। ओमान और जिनेवा में हुई वार्ताओं में ईरान ने मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति जताई है, ताकि युद्ध को टाला जा सके या देरी की जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इन वार्ताओं का इस्तेमाल खुद ताकत इकट्ठा करने के लिए भी कर सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तीसरे चरण की वार्ता पर सहमति बनी है। इन वार्ताओं में ईरान के विदेश मंत्री के साथ अमेरिका की ओर से ट्रंप के मित्र स्टीव व्हिटकॉफ और उनके दामाद जैरेड कुशनर शामिल रहे हैं।

1. क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापक युद्ध की आशंका
ईरान अपनी मिसाइलों और ड्रोनों से बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुका है। इसके अलावा, वह इस्राइल और जॉर्डन जैसे देशों के बुनियादी ढांचे पर भी हमला कर सकता है, क्योंकि इन देशों के सैन्य ठिकानों से ही अमेरिका आगे कार्रवाई की योजना बना रहा है।

2. वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाकर इस अहम मार्ग को बंद करने की कोशिश कर सकता है। विश्व का लगभग 20-25% तेल और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) इसी मार्ग से गुजरता है, जिसके रुकने से वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषणों का मानना है कि वर्तमान में वैश्विक तेल आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतें कम हैं, इसलिए हमले के बाद कीमतों में उछाल सीमित हो सकता है।

3. ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव
अमेरिकी हमलों का प्रमुख मकसद ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करना और शासन परिवर्तन करना हो सकता है। ऐसी स्थिति में या तो ईरान में अयातुल्ला शासन में बदलाव हो सकता है या फिर सत्ता इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) जैसे कट्टरपंथी सैन्य गुटों के हाथ में जा सकती है।

4. मानवीय संकट
अगर संघर्ष के कारण ईरानी शासन पूरी तरह चरमरा जाता है, तो देश में गृहयुद्ध और जातीय संघर्ष (जैसे कुर्दों और बलूचियों के बीच) छिड़ सकता है। लगभग 9.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में अराजकता से बड़े पैमाने पर मानवीय और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

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