Pollution: बढ़ता प्रदूषण घोंट रहा दम, डॉक्टर ने ऐसे मरीजों को दिल्ली छोड़ने की दी सलाह

 

 

राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों घातक वायु प्रदूषण की चपेट में है। हवा में बढ़ते प्रदूषण के सूक्ष्म कण सांसों को चोक कर रहे हैं, लिहाजा खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है, आंखों में जलन बढ़ रही है और लोगों को सिरदर्द जैसी समस्याएं अधिक हो रही हैं।

एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (ईडब्ल्यूएस) की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आई और यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। सुबह करीब 7 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 371 तक दर्ज किया गया। हालांकि, निजी वायु गुणवत्ता निगरानी समूहों ने एक्यूआई को थोड़ा कम यानी 242 बताया।

पिछले कुछ हफ्तों से जिस तरह से दिल्ली की हवा में प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर देखा जा रहा है, इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते हैं। इतना ही नहीं दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपी चंद खिलनानी ने उन लोगों को अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली में न रहने की सलाह दी है जो पहले से ही फेफड़ों की किसी क्रॉनिक बीमारी का शिकार हैं या फिर बुजुर्ग हैं। डॉक्टर ने कहा, हवा की खराब होती गुणवत्ता सांस से संबंधित समस्याओं को ट्रिगर करने वाली हो सकती है।
बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों के लिए बढ़ सकती है मुश्किलें

मीडिया से बातचीत में डॉ खिलनानी कहते हैं, प्रदूषण का ये स्तर फेफड़ों के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। ऐसे में पहले से जिनको सांस की समस्या है, प्रदूषण के कारण इसके ट्रिगर होने का खतरा हो सकता है। ऐसे लोग यदि सक्षम हैं तो अगले छह से आठ सप्ताह के लिए दिल्ली से कहीं बाहर चले जाएं, ऐसा करके आप प्रदूषण से बचाव कर सकते हैं और सेहत को ठीक रख सकते हैं।

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गौरतलब है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में धुंध की मोटी चादर छाई हुई है, जिससे कई प्रकार का स्वास्थ्य संकट पैदा हो रहा है। डॉक्टर कहते हैं, घर के अंदर और बाहर के प्रदूषण के कारण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अमृत सहाय कहते हैं, बढ़ता प्रदूषण उन लोगों के लिए तो खतरनाक है ही जिनको पहले से सांस की कोई दिक्कत है, इसके अलावा प्रदूषित हवा के अधिक संपर्क में रहना पहले से स्वस्थ लोगों में भी इन बीमारियों को बढ़ाने वाला हो सकता है।

दिल्ली में सर्दी की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। हवा में धूल, धुआं, पराली जलने और औद्योगिक कचरे से निकलने वाले जहरीले गैसों के मिश्रण के कारण लोगों के लिए सांस लेना कठिन होता जा रहा है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों तक जाकर फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करते हैं, जिससे सांस फूलने, खांसी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

फेफड़ों के साथ हृदय पर भी असर

एम्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रदूषण के दिनों में अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की संख्या लगभग 30% बढ़ जाती है। बच्चों और बुजुर्गों को इसका असर सबसे पहले महसूस होता है, क्योंकि उनकी इम्यून सिस्टम कमजोर होती है।

प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। हवा में मौजूद जहरीले तत्व खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देते हैं, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अध्ययन में पाया गया है कि प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 20-25% तक बढ़ जाता है।

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