उत्तरकाशी में आपदा- विनाशकारी तबाही की सामने आई ये वजह,इसलिए एक नहीं 2 बार तेजी से नीचे आया पानी संग मलबा

 

त्तरकाशी के धराली में खीर गंगा में कई बार जलस्तर बढ़ने के कारण वहां पर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान हुआ था। वहां पर नदी का जलग्रहण क्षेत्र कम होने और तेज ढाल की वजह से पानी तेजी से नीचे की ओर आता है। इसीलिए मंगलवार को बादल फटने के बाद मलबा और पानी तेजी से धराली बाजार तक पहुंचा, जिससे किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।

धराली में खीर गंगा में यह पहली बार नहीं हुआ कि उसका जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्र को नुकसान हुआ है। इसके बाद भी स्थानीय लोग नहीं चेते और न ही शासन प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। हालांकि वर्ष 2023 में खीर गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण वहां पर कई दिनों तक गंगोत्री हाईवे भी बंद रहा था।

साथ ही दुकानों और होटलों को भी नुकसान हुआ था। उसके बाद वहां पर सुरक्षात्मक कार्य तो हुए लेकिन नदी का स्पैन कम होने के कारण वह विनाशकारी आपदा को नहीं रोक पाया।

 

इससे पूर्व वर्ष 2017-18 में भी खीरगंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण होटलों, दुकानों और कई घरों में मलबा घुसा था। उस समय भी आपदा से उभरने में लोगों को करीब एक वर्ष का समय लग गया था। हालांकि उस समय किसी प्रकार की जिंदगी को नुकसान नहीं हुआ था।

 

उत्तरकाशी में खीरगंगा नदी में सैलाब
उत्तरकाशी में जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर धराली गांव के ऊपर खीरगंगा में मंगलवार दोपहर बादल फटने से खीरगंगा नदी में सैलाब आ गया। तेजी से आए मलबे और पानी की चपेट में आने से धराली का मुख्य बाजार पूरी तरह तबाह हो गया। साथ ही प्रसिद्ध कल्प केदार मंदिर भी पूरी तरह मलबे में बह गया है।

और पढ़े  उत्तराखंड: CM धामी ने दी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं, कहा-नारी सम्मान को मजबूत करता है यह पर्व

 

जिला प्रशासन ने बताया कि देर शाम तक 130 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका था। चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। जबकि करीब 70 लोग लापता बताए जा रहे हैं। साथ ही 30 होटल-दुकान-घर मलबे में बहने के कयास लगाए जा रहे हैं। हर्षिल घाटी में मंगलवार को तीन जगह बादल फटे।
 

दोपहर करीब 1.50 बजे गांव के ऊपर बादल फटा
खीर गंगा में बादल फटने से सबसे ज्यादा तबाही धराली में मची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 1.50 बजे गांव के ऊपर बादल फटा। इसके बाद महज 20 सेकंड के भीतर खीरगंगा नदी का पानी और मलबा मुख्य बाजार की ओर मुड़ गया।

 

जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़े लोग
लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे, लेकिन इससे पहले कि वह सुरक्षित जगह पर पहुंच पाते सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया। वहां मौजूद कई होटल, रिसॉर्ट, दुकानें, घर और सेब के बगीचे जमींदोज हो गए। वहां चीख-पुकार मच गई।

Uttarakhand Uttarkashi Cloud Burst water came down rapidly Due to the steep slope in path of Kheer Ganga

व्यावसायिक इमारतों को हुआ ज्यादा नुकसान
लोगों का कहना है कि अगर नदी का बहाव सीधे आगे बढ़ता तो गांव की बस्ती को भी भारी नुकसान हो सकता था लेकिन पानी बाजार की ओर मुड़ जाने से सबसे ज्यादा नुकसान व्यावसायिक इमारतों को हुआ है। एक बार पानी के साथ मलबा आया व उसके बाद कुछ देर के लिए रुक गया। कुछ देर बाद दोबारा मलबा आया।

 

प्रभावितों की हरसंभव मदद के निर्देश : सीएम
सीएम धामी ने बताया कि जिला प्रशासन, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत अन्य एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। प्राथमिकता के आधार पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावितों की हर संभव मदद के निर्देश दिए गए हैं।

  • Related Posts

    पौड़ी- विकासखंड थलीसैंण के दूरस्थ मजरा महादेव पहुंचीं DM, तहसील दिवस में 175 से अधिक शिकायतों पर मौके से तय हुई कार्रवाई

          दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक न आना पड़े, इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता…

    गड़बड़- उत्तराखंड में तबादलों के लिए शिक्षिकाएं ले रहीं कागजी तलाक, मामलों के खुलासे पर बैठी जांच

    शिक्षा विभाग में सुगम क्षेत्रों में तबादला पाने के लिए शिक्षिकाएं कागजी तलाक का सहारा ले रही हैं। यह मनचाही तैनाती पाने का तरीका है। हाल ही में हुए 1500…