अयोध्या राम मंदिर में संगमरमर फर्श पर होगी रंगबि, मार्बल की दीवारों के झरोखों में सुंदर चित्रकारी

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अयोध्या राम मंदिर में संगमरमर फर्श पर होगी रंगबिरंगी मीनाकारी, मार्बल की दीवारों के झरोखों में सुंदर चित्रकारी
अयोध्या रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के दिव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माणाधीन राम मंदिर में गर्भगृह के साथ गूढ़ मंडप, रंग मंडप व नृत्यमंडप का निर्माण एक साथ चल रहा है।
अयोध्या राम मंदिर में संगमरमर फर्श पर होगी रंगबिरंगी मीनाकारी, मार्बल की दीवारों के झरोखों में सुंदर चित्रकारी
अयोध्या रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के दिव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माणाधीन राम मंदिर में गर्भगृह के साथ गूढ़ मंडप, रंग मंडप व नृत्यमंडप का निर्माण एक साथ चल रहा है। गर्भगृह का निर्माण जहां श्वेत मार्बल से किया जा रहा है। वहीं शेष भागों का निर्माण बंशीपहाड़पुर के पिंक सैंड स्टोन से हो रहा है। इस सैंड स्टोन के संकरे रिक्त स्थानों को भरने के लिए चंडीगढ़ से मंगवाए विशेष प्रकार के तीन होल वाले ब्रिक्स का प्रयोग किया जा रहा है।
अष्टकोणीय गर्भगृह की ऊंचाई 24 गुणा 24 फिट है और इसमें नक्काशीदार 12 स्तम्भ लगाए जाने है जिसमें अब तक छह स्तम्भों को लगाया जा चुका है। इस निर्माण के सम्बन्ध में पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंजीनियर गिरीश सहस्त्र भोजनी ने बताया कि गर्भगृह की सुंदरता को बढ़ाने के लिए अर्श से फर्श तक संगमरमर पत्थरों पर खूबसूरत रंग-बिरंगी मीनाकारी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि गर्भगृह की दीवारों पर निर्मित होने वाले झरोखों में भी सुंदर चित्रकारी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि रामलला के विग्रह को लेकर मंथन चल रहा है। फिलहाल यह विग्रह तीन फिट ऊंची होगी और विग्रह के लिए ढाई फिट की संगमरमर की चौकी बनाई जाएगी। इसी चौकी के ऊपर अष्टदल कमल का पुष्प होगा जिस पर रामलला विराजित होंगे।
46 फिट गहरी व 40 फिट ऊंची सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा
सरयू नदी की धारा से राम मंदिर के नींव की मिट्टी के कटान को रोकने के लिए सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वाल) का निर्माण पूरा हो गया है। रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के इंजीनियर गिरीश सहस्त्र भोजनी बताते हैं कि इसरो के वैज्ञानिकों के सुझाव पर यह निर्माण कराया गया है। यह वाल पश्चिम से लेकर उत्तर-दक्षिण में 380 फिट लंबी, जमीन की सतह से 46 फिट गहरी है और सतह से 40 फिट ऊंची है। चौड़ाई डेढ़ मीटर है। परिसर का ढ़लान पूरब से पश्चिम को है। इसके चलते भविष्य में सरयू की धारा बदलने पर कटान की आशंका खत्म करना जरूरी था। इस वाल से तीन मीटर अंदर की तरफ परकोटा निर्माण के लिए मिट्टी की भराई अंतिम चरण में है।
महंत नृत्यगोपालदास ने किया रामलला का दर्शन, निर्माण भी देखा
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष व मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपालदास ने शुक्रवार की शाम रामलला का दर्शन किया और निर्माण कार्य देखा। उन्होंने कार्य के प्रति संतोष व्यक्त किया। महासचिव चंपत राय ने बताया कि एलएण्डटी ने अतिथियों के लिए डिजिटल बुक बनाई है, जिसमें महंत नृत्यगोपाल दास ने निर्माण को अदभुत बताया है। उन्हें व्हीलचेयर से उस स्थान पर ले जाया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुष्पार्चन कर दीप जलाया था

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