नहीं छूटा पद: हरिवंश निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपसभापति, कौन हैं हरिवंश नारायण सिंह

Spread the love

राज्यसभा में शुक्रवार को इतिहास बन सकता है। दरअसल, यहां पहली बार किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति यानी डिप्टी चेयरमैन का पद मिल सकता है। यह नाम है- हरिवंश नारायम सिंह का, जिन्हें बीते हफ्ते ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। इसे लेकर विपक्ष की भौहें तनी हैं। दरअसल, कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्षी दलों का आरोप है कि हरिवंश नारायण के नामांकन के लिए उनके साथ कोई मतलब की चर्चा नहीं की गई। इतना ही नहीं विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने बीते सात साल से लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली छोड़ा है। इसे लेकर अब विपक्ष ने उपसभापति की चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

 

इस बीच जिस डिप्टी चेयरमैन पद को लेकर विपक्ष नाराजगी जता रहा है, उसके बारे में भी एक बात जानना अहम है। यह पद 2018 से ही हरिवंश नारायण सिंह के पास रहा है, जो कि एक बार फिर मनोनीत सांसद के तौर पर इसे ग्रहण कर सकते हैं। ऐसे में राज्यसभा के उपसभापति पद के साथ-साथ यह जानना जरूरी है कि आखिर इस पद पर नौ साल तक आसीन रहने वाले हरिवंश नारायण कौन हैं और उनका परिचय क्या है? उनका राज्यसभा का कार्यकाल कैसा रहा है? उपसभापति के तौर पर कैसे उन्हें राज्यसभा भेजने वाले दल का ही सत्तासीन गठबंधन से बैर हो गया, लेकिन हरिवंश अपने पद से नहीं हटाए गए? आइये जानते हैं…

 

कैसा रहा हरिवंश नारायण सिंह का शुरुआती जीवन?

हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनका संबंध सारण के सिताब दियारा गांव से है, जो कि प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) का भी पैतृक गांव रहा है।

और पढ़े  Delhi- मालवीय नगर हादसे में 21 की मौत, ऐसी सभी इमारतों का निरीक्षण करने के निर्देश

उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। इसके साथ ही, उन्होंने बीएचयू से ही पत्रकारिता में पोस्ट-ग्रेजुएट (पीजी) डिप्लोमा भी पूरा किया। बताया जाता है कि छात्र जीवन के दौरान उन पर जेपी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का गहरा प्रभाव पड़ा। इसी वैचारिक प्रेरणा के चलते उन्होंने 1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था।

राजनीति में आने से पहले किस पेशे से जुड़े थे?

उनके पेशेवर सफर की शुरुआत काफी साधारण रही। उन्होंने अपनी पहली नौकरी मात्र 500 रुपये प्रति माह के वेतन पर शुरू की थी। 1977 में, वे एक प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में एक अंग्रेजी मीडिया समूह से जुड़े। इसके बाद वे मुंबई चले गए और 1981 तक धर्मयुग पत्रिका के लिए काम किया। पत्रकारिता के अलावा, उन्होंने कुछ समय के लिए बैंकिंग क्षेत्र में भी हाथ आजमाया और 1981 से 1984 तक बैंक ऑफ इंडिया में एक बैंक अधिकारी के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे फिर से पत्रकारिता के क्षेत्र में लौट आए और एक अन्य पत्रिका से जुड़ गए।

पत्रकारिता से राजनीति में आने का सफर कैसा रहा?

हरिवंश नारायण सिंह का पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर काफी दिलचस्प और उपलब्धियों भरा रहा है। उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक मीडिया जगत में काम करने के बाद राजनीति में एक अहम मुकाम हासिल किया। दरअसल, उनके पत्रकारिता करियर में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब वे रांची में एक अखबार के संपादक नियुक्त हुए। इस पद पर वे अगले 25 साल से ज्यादा समय तक रहे। हालांकि, इसी दौरान वे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार भी रहे, जिससे सियासत में भी उनकी पहचान बनी।

और पढ़े  Delhi- राजधानी में बड़ा हादसा, जोरदार धमाके के बाद गिरी बिल्डिंग, 3 लोग मलबे से निकाले

और फिर अचानक हुआ राजनीति में प्रवेश

राजनीति में उनका प्रवेश काफी अप्रत्याशित कहा जाता है। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने उन्हें अचानक राजनीति में आने का मौका दिया और 2014 में जदयू की ओर से उन्हें पहली बार राज्यसभा के लिए नामित किया गया। एक मौके पर हरिवंश ने खुद इस घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने राज्यसभा जाने के बारे में तब तक कोई जानकारी नहीं थी, जब तक कि खुद नीतीश कुमार ने उन्हें फोन करके नहीं बताया।

राजनीति में कैसा रहा है अब तक का सफर?

हरिवंश नारायण सिंह का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प और उपलब्धियों भरा रहा है। हालांकि, इस दौरान जिस पार्टी की तरफ से उन्हें राज्यसभा भेजा गया था, उससे ही खटपट की कई खबरें सामने आईं। आलम तो यह भी हुआ कि केंद्र में सत्तासीन एनडीए गठबंधन ने उन्हें राज्यसभा का उपसभापति बनाया, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें नामित करने वाली जदयू ही इस गठबंधन से बाहर हो गई। लेकिन हरिवंश के डिप्टी चेयरमैन पद पर कोई खास विवाद नहीं हुआ और भाजपा ने उन्हें इस पद पर बनाए रखा।

1. राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पहला कार्यकाल
अगस्त 2018 में वे राजनीति में एक बड़े मुकाम पर पहुंचे जब उन्हें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (जिसका जदयू भी हिस्सा थी) के उम्मीदवार के रूप में पहली बार राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। इस चुनाव में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बीके. हरिप्रसाद के 105 वोटों के मुकाबले उन्हें 125 वोट मिले थे।

और पढ़े  बहुत शानदार रहा कार्यकाल: सीडीएस पद से विदा हुए जनरल अनिल चौहान, रविवार को कमान संभालेंगे नए प्रमुख एनएस.राजा सुब्रमणि

2. दूसरा कार्यकाल और उपसभापति पद पर वापसी
साल 2020 में हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए फिर से नामित किया गया और वे एक बार फिर एनडीए के उम्मीदवार के रूप में उपसभापति पद के लिए चुने गए। अपने इस कार्यकाल के दौरान, उन्होंने तीन विवादास्पद कृषि बिलों के पारित होने की अध्यक्षता की थी, जिस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया था और उन्हें पद से हटाने का नोटिस भी दिया था। हालांकि, इसे तत्कालीन सभापति ने खारिज कर दिया था।

3. पार्टी लाइन से हटकर संवैधानिक पद को प्राथमिकता (2022-2023)
अगस्त 2022 में जब जदयू ने एनडीए से नाता तोड़ लिया और महागठबंधन में शामिल हो गई, तब भी हरिवंश उपसभापति के पद पर बने रहे। इसके अलावा, जब 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन का जदयू समेत अधिकांश विपक्ष ने बहिष्कार किया था, तब भी उन्होंने इसमें हिस्सा लिया और अपने सांविधानिक दायित्वों का निर्वहन किया। यह उनकी पार्टी लाइन से परे जाने वाली छवि को गढ़ने वाला फैसला था। बताया जाता है कि जदयू के नेताओं ने इस पर नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन हरिवंश ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।

और अब तीसरा कार्यकाल और एक ऐतिहासिक उपलब्धि 
9 अप्रैल 2026 को उनका दूसरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद, 10 अप्रैल 2026 को ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उनका यह नया कार्यकाल 2032 तक रहेगा। 17 अप्रैल 2026 को, उन्हें लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में चुना जाना तय हुआ है, जिसके चुनाव का विपक्ष ने बहिष्कार किया है।

यह एक ऐतिहासिक पल है क्योंकि वह राज्यसभा के उपसभापति बनने वाले पहले मनोनीत सांसद होंगे।


Spread the love
  • Related Posts

    Delhi- मालवीय नगर हादसे में 21 की मौत, ऐसी सभी इमारतों का निरीक्षण करने के निर्देश

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली के मालवीय नगर के हौजरानी स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में भीषण आग लग गई। इस आग की वजह से अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी…


    Spread the love

    विदेश मंत्रालय ने की कुवैत एयरपोर्ट पर हमले की निंदा, भारतीय नागरिक की मौत पर जताई संवेदना

    Spread the love

    Spread the loveविदेश मंत्रालय (एमईए) ने आज कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले की निंदा की है। इस हमले में एक भारतीय की मौत हो गई और कई अन्य…


    Spread the love