राम मंदिर में अब सेवा और परंपरा के नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए अयोध्या के संतों को जोड़ते हुए एक नई धार्मिक समिति का गठन किया है। इस समिति में अयोध्या के पांच प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत भी शामिल हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि राम मंदिर अब सिर्फ निर्माण नहीं, सेवा और परंपरा के नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है, जिसमें अयोध्या के संतों की भूमिका सबसे अहम होगी।
बिंदुवार व्यवस्थाओं में किया गया परिवर्तन
धार्मिक समिति का गठन : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या के संतों को जोड़ने के लिए नई धार्मिक समिति बनाई गई। पांच संतों को मिली जगह : समिति में अयोध्या के कई प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत भी शामिल किए गए, इनमें मणिराम छावनी से लेकर रामानंदीय परंपरा के संत शामिल हैं। इन प्रमुख लोगों में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी परमानंद महाराज, रामानंद संप्रदाय के महंत विनेंद्र दास, मणिरामदास छावनी के कमल दास महाराज, रामानंद दास, राजकुमार दास अधिकारी, मिथलेश नंदनी शरण का नाम प्रमुख है।
पूजा-पद्धति का निर्धारण : भगवान की सेवा-पूजा कैसे हो, इसका पूरा निर्धारण अब यही समिति करेगी।
उत्सवों की नई तिथियों के निर्धारण की जिम्मेदारी : राम मंदिर के सभी उत्सवों की तिथि और स्वरूप कैसा हो, इसका मार्गदर्शन समिति देगी।
पहली बार झूलोत्सव पर निर्णय : जन्माष्टमी पर पहली बार रात्रि में श्री कृष्ण झूला उत्सव का आयोजन हुआ।
पंच देवता यज्ञ शुरू : मंदिर परिसर के यज्ञ स्थल में रोज पंच देवता यज्ञ विधिवत शुरू किया गया है।
शृंगार आरती में बदलाव : सुबह की शृंगार आरती को अधिक व्यवस्थित और नए स्वरूप में किया गया है।
संतों का पदगान : वैष्णव परंपरा के अनुसार मंदिर में रोज संत पदगान (भजन-कीर्तन) शुरू कर दिए।
अखंड संकीर्तन की तैयारी : शृंगार आरती से शयन आरती तक श्री राम जय राम जय जय राम विजय मंत्र का अखंड संकीर्तन एक निश्चित स्थान से लेकर समूचे परिसर में जल्द शुरू होगा।








