अर्धकुंभ को पूर्णकुंभ या महाकुंभ की संज्ञा देकर शासन और प्रशासन जहां तैयारियों में जुटा है, वहीं अखाड़े और आश्रम से कुछ लोग समय-समय पर बयान जारी कर पूरी तैयारी को असमंजस में डाल रहे हैं। इससे न केवल मेला प्रशासन सकते में आ रहा है, बल्कि तरह-तरह की चर्चाएं भी आम हो रही हैं।
बता दें कि बीते दिनों एक अखाड़े के शीर्ष संत ने अपने बयान में कुंभ की तैयारियों पर सवाल उठाए तो प्रशासन ने घूम-घूमकर सभी अखाड़ों के संतों का वीडियो बयान बनाकर वायरल किया। यह प्रयास उस संत के बयान का खंडन करना बताया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें न तो वार्ता के लिए बुलाया गया और न ही कोई चर्चा की गई। अब फिर से एक आश्रम में साधु समाज की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता और संचालन करते हुए संत, महंत ने खुद की उपेक्षा बताते हुए कुंभ को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। यही नहीं इस बैठक में अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े किए गए।







