हल्द्वानी: पिता और मां ने अपने गुमशुदा बेटे से की ये अपील, – बेटा जहां भी हो, चले आओ..अपहरण का भी केस दर्ज

 

 

ल्द्वानी के जीतपुर नेगी से डीपीएस के नौवीं के छात्र यथार्थ का दूसरे दिन भी पता नहीं लगने के बाद पुलिस ने उसके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इसमें परिजनों ने यथार्थ को बंधक बनाए जाने की आशंका जताई है। कोई खास सुराग न लगने के कारण पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

रामपुर रोड पर नेक्सा शोरूम के नजदीक महादेव एंक्लेव कॉलोनी के रहने वाले व्यापारी योगेश मिश्रा का बेटा यथार्थ बृहस्पतिवार को परीक्षा देने के लिए स्कूटी से स्कूल गया था। शाम तक न लौटने पर उसकी खोजबीन शुरू हुई। रात करीब 11 बजे घर से कुछ दूर जंगल में उसकी स्कूटी और किताबें जली हुई मिलीं। हालांकि बैग नहीं मिला। रात को ही वहां पहुंचे परिजन और पुलिस इन हालात से सकते में आ गए। दूसरे दिन भी यथार्थ का कुछ पता न चलने पर कोतवाली पुलिस ने पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। शुक्रवार सुबह एसपी सिटी प्रकाश चंद्र और सीओ सिटी नितिन लोहनी मौके पर पहुंच गए। उनके नेतृत्व में कोतवाली पुलिस ने छानबीन की।

 

 

डॉग स्क्वाड भी नहीं लगा सका कुछ पता
यथार्थ का पता लगाने के लिए अफसरों ने शुक्रवार को डॉग स्क्वाड का भी सहारा लिया। रामपुर रोड से बरेली मार्ग पर जाने वाले रास्ते पर जहां स्कूटी जली मिली, वहीं से स्क्वाड ने अपनी जांच शुरू की। खोजी कुत्ते को स्कूटी के आसपास सुंघाया गया। वह पहली बार अर्जुनपुर की तरफ करीब ढाई किलोमीटर दूर तक गया। दोबारा में वह मौके से दाहिनी तरफ जंगल में इतनी ही दूरी तक पहुंचा। दोनों तरफ आसपास का क्षेत्र पुलिस ने खंगाला, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

जहां स्कूटी जली मिली, वहां दोनों ओर से आने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। सोशल मीडिया एकाउंट भी देखा जा रहा है। यथार्थ के पास मोबाइल फोन नहीं है, ऐसे में ट्रेस करने में दिक्कत आ रही है। जल्द ही उसे ढूंढने के प्रयास किए जा रहे हैं। -प्रकाश चंद्र, एसपी सिटी

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बेटा जहां भी हो, चले आओ…
पिता योगेश और मां सीमा ने गुमशुदा बेटे यथार्थ तक अपनी मार्मिक अपील पहुंचाने का प्रयास किया है। कहा- बेटा जहां भी है, चले आओ। हमारी कोई भी गलती है, तो उसे हम स्वीकार कर लेंगे। तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे। मम्मी-पापा दोनों रो रहे हैं। पूरी रात दरवाजा की ओर देखते रहे। यथार्थ को घर से गए 24 घंटे से ज्यादा का समय हो गया। पड़ोसियों के साथ ही परिवार के परिचित सभी लोग माता-पिता और बहन को यथार्थ के जल्द लौटने का ढाढ़स बंधाते रहे। शुक्रवार शाम तो माता-पिता का हाल यह हो गया कि उनके मुंह से कोई शब्द निकालना मुश्किल हो गया, सिर्फ आंखों से आंसू ही निकल रहे थे। बहन आस्था भी भाई की याद में बेहाल है। कई रिश्तेदार भी पहुंचे हैं।

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