Haldwani- Accident: किशोर की मौत पर चालक और मालिक पर FIR दर्ज, अफसरों पर एक्शन का इंतजार

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ल्द्वानी के मुखानी-पनचक्की मार्ग पर जगदंबा बैंक्वेट हाॅल के निकट सड़क पर बने गड्ढे से बाइक उछली और पीछे बैठे अर्जुन मौर्य (13 वर्ष) की नो एंट्री में चल रहे भारी वाहन (मिक्सर कैप्सूल) के पहिये के नीचे आने से मौत हो गई। मंगलवार देर रात हल्द्वानी कोतवाली में अर्जुन के भाई व घटना के चश्मदीद ललित मौर्य की तहरीर पर वाहन के स्वामी और अज्ञात चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है लेकिन ये सवाल अब भी बरकरार है कि क्या गड्ढा खोदवाकर छोड़ने और नो-एंट्री में भारी वाहन चलाने की अनुमति देने वाले अफसरों पर प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई।

ललित मौर्य ने कोतवाली में दी तहरीर में कहा कि पांच जनवरी की शाम वह बाइक पर अपने छोटे भाई अर्जुन के साथ आ रहा था। शिव मंदिर के निकट भारी वाहन (यूके04सीसी8420) ने बाइक को टक्कर मार दी और उसके पहिये के नीचे आने से अर्जुन की मौत हो गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर वाहन स्वामी और वाहन के अज्ञात चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। घटना का मूल कारण सड़क पर बना गड्ढा था जो कई दिन पहले खोदकर छोड़ दिया गया था। इस मार्ग पर दिन में भारी वाहनों की नो एंट्री भी है। ऐसे में लोगों का सवाल था कि गड्ढा खोदकर छोड़ने वाले और नो एंट्री में दिन में ही भारी वाहन को चलाने का आदेश देने वाले भी किशोर की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। उन पर भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

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पिता का छलका दर्द : मेरे अर्जुन की मौत के लिए लापरवाह सिस्टम जिम्मेदार

भट्ट काॅलोनी में कई वर्षों से परिवार के साथ रहने वाले बरेली के भोजीपुरा के शाहपुर पट्टी निवासी डोरी लाल ने अपना 13 साल का बच्चा खोया है। बुधवार को उनके टिनशेडनुमा आवास में मातम पसरा था। लोग अर्जुन की मौत पर दुख जताने पहुंचे थे। दोपहर में कमिश्नर दीपक रावत ने भी वहां पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। डोरीलाल का कहना है कि सिस्टम की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ली है। यदि उस मार्ग पर भारी वाहन नहीं चलता तो उनका अर्जुन आज जिंदा होता। सड़क बनाने के दौरान गड्ढा खोदकर लंबे समय तक यूं न छोड़ा होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। अर्जुन की मौत के लिए सिर्फ और सिर्फ सिस्टम दोषी है।

दिन में बंद हो भारी वाहनों की आवाजाही

अर्जुन के सबसे बड़े भाई धर्मेंद्र ने कहा कि दिन में भारी वाहनों की आवाजाही तो पूरे शहर में बंद हो जानी चाहिए। स्कूल की टाइमिंग के दौरान भारी वाहन गलियों में दौड़ते हैं। नो एंट्री तो केवल कागजी है। ऐसे वाहनों को कोई भी नहीं रोकता है। आज यदि नो एंट्री में भारी वाहनों का प्रवेश दिन में रोका होता तो मेरे भाई की असमय ही मौत नहीं होती।


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