गूगल ने भारत में बाल यौन शोषण कंटेंट से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय अधिकारियों को देने पर सहमति जताई है। यह कदम कंपनी की मौजूदा वैश्विक व्यवस्था से अलग है। अभी ऐसे मामलों की रिपोर्ट पहले अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (एनसीएमईसी) को भेजी जाती है। इसके बाद एनसीएमईसी संबंधित देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक रिपोर्ट पहुंचाता है।
भारतीय अधिकारियों ने हाल के हफ्तों में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों से भारत से संबंधित बाल शोषण कंटेंट के मामलों की जानकारी सीधे भारतीय एजेंसियों को देने का आग्रह किया था। अधिकारियों की चिंता थी कि मौजूदा व्यवस्था में रिपोर्ट पहले अमेरिकी संस्था तक पहुंचती है और उसके बाद स्थानीय एजेंसियों को भेजी जाती है। इससे कार्रवाई में महत्वपूर्ण समय लग सकता है।
2025 में NCMEC को मिलीं 2.13 करोड़ से ज्यादा रिपोर्ट
बाल यौन शोषण कंटेंट की समस्या दुनियाभर में बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी संस्था एनसीएमईसी की साइबरटिपलाइन को 2025 में दुनियाभर से बच्चों के यौन शोषण और ऑनलाइन शोषण से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की 2.13 करोड़ से ज्यादा रिपोर्ट मिली थीं।
गूगल ने पहले बताया है कि वह ऐसी कंटेंट की पहचान के लिए हैश-मैचिंग तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद लेता है। कंपनी के अनुसार, संदिग्ध कंटेंट की पुष्टि के बाद उसे हटाने और संबंधित मामलों की रिपोर्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।






