जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारत के नए सीडीएस के रूप में पदभार संभाला, सैन्य सुधारों पर रहेगा फोकस

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नरल एन एस राजा सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्हें पाकिस्तान और चीन के मामलों का बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। उनका मुख्य उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिलिट्री थिएटरेशन’ (सैन्य थियेटराइजेशन) योजना को लागू करना और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना है।

उन्होंने जनरल अनिल चौहान की जगह ली है। जनरल सुब्रमणि ने अपने पूर्ववर्तियों, दिवंगत जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के शानदार नेतृत्व और योगदान के प्रति आभार जताया। जनरल चौहान शनिवार को देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करके सेवानिवृत्त हुए। जनरल सुब्रमणि इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। वह पिछले साल 31 जुलाई को थल सेना के उप प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे।

 

पद संभालने के बाद क्या बोले सीडीएस?
पद संभालने के बाद जनरल सुब्रमणि ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य ध्यान सशस्त्र बलों के बदलाव और संगठनात्मक सुधारों पर होगा। वह प्रधानमंत्री के ‘JAI’ विजन यानी जॉइंटनेस (तालमेल), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (नवाचार) को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों की ट्रेनिंग और उनका कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

 

 

जनरल सुब्रमणि ने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य आधार है। वह सेना में स्वदेशी हथियारों के विकास और उन्हें शामिल करने के काम में तेजी लाएंगे। आधुनिकीकरण के लिए सेना, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और रिसर्च क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। उन्होंने पूर्व सैनिकों और ‘वीर नारियों’ के कल्याण का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पूरा देश भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एकजुट है।

उन्होंने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने देश के हितों की रक्षा की है। उन्होंने उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जिनके बलिदान से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सशस्त्र बल समर्पण, साहस और सम्मान के साथ देश की सेवा करते रहेंगे। सीडीएस के रूप में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी एकीकृत सैन्य कमान बनाना है।

कई अहम पदों पर कर चुके हैं काम
जनरल सुब्रमणि का सैन्य करियर 40 साल से भी ज्यादा लंबा है। उन्होंने अलग-अलग इलाकों और संघर्षों के बीच काम किया है। वह 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थल सेना के उप प्रमुख रहे। इससे पहले मार्च 2023 से जून 2024 तक वह मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के छात्र रहे हैं। 14 दिसंबर 1985 को उन्हें गढ़वाल राइफल्स की आठवीं बटालियन में कमीशन मिला था।

उन्होंने ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी पढ़ाई की है। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से एमए और मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल की डिग्री है। उन्होंने असम में ‘ऑपरेशन राइनो’ के तहत 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और मध्य क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया। उन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर सेना की एक प्रमुख स्ट्राइक कोर सहित दो कोर की कमान भी संभाली।

उनके अन्य महत्वपूर्ण पदों में कजाकिस्तान में रक्षा अताशे और सैन्य खुफिया विभाग के उप महानिदेशक का पद शामिल है। वह पूर्वी कमान में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) और उत्तरी कमान के मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ भी रहे। उनकी शानदार सेवा के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक मिले हैं।

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