पिछले महीने बिहार में सामान्य से 33 प्रतिशत(लगभग 152 मिलीमीटर) कम बारिश हुई। राज्य में करीब 21 साल बाद ऐसे हालात बने हैं, जिससे लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान रहे। सितंबर की शुरुआत में तापमान में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन अब भी राज्य में पर्याप्त बारिश नहीं हो रही। इस महीने भी औसत बारिश होने की संभावना कम ही है। कम बारिश के बावजूद, बिहार पर बाढ़ का संकट गहराया हुआ है।
इसके चलते कहीं कटाव में मकान और मंदिर बह रहे हैं, तो कहीं सड़कों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है और सुरक्षा के लिहाज से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली काट दी गई है। आइए, जानते हैं मौजूदा हालात का पूरा अपडेट।
पटना में कहां-कहां खतरा, आठ जिलों को अलर्ट
जल संसाधन विभाग द्वारा प्राप्त पूर्वानुमान (Forecasting) के अनुसार पटना जिले में गांधी घाट पर आज रात्रि तथा हाथीदह (मोकामा) में दिनांक 04 सितंबर को दोपहर के समय गंगा नदी का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) को पार करने की आशंका है। गंगा नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि एवं उससे उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद जिलों के नदी के किनारे एवं निचले क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों से अपील की जाती है कि वे पूर्ण सतर्कता एवं सावधानी बरतें तथा किसी भी प्रकार का जोखिम न लें।
पटना में कई जगह गंगा नदी का पानी सड़क पर दिख रहा है। इसके वीडियो वायरल हो रहे हैं। गंगा, सोन और पुनपुन नदियां खतरे के निशान के पार हैं। यही कारण है कि बख्तियारपुर में गंगा हाइवे को छू रही है। पटना शहर में सौंदर्यीकरण के लिए बनाए घाटों पर पानी भर चुका है। नदी के तट पर लोगों को जाने से रोका जा रहा है। दीघा घाट से लेकर एनआईटी घाट तक कई जगह सड़क के किनारे पानी दिख रहा है। पटना सिटी में कई घाटों को पार कर पानी आसपास के निचले इलाकों में घुसा हुआ है। जिनके नाले गंगा की ओर खुलते हैं, उनके पास उधर से ही अब पानी आ रहा है। इन सारी स्थितियों के बीच भी स्थिति अभी नियंत्रण में है।
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल; गंगा-सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा; पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, अनीसाबाद; पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी तथा बाढ़ नियंत्रण प्रखंड, बख्तियारपुर के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया कि ईसी बैग, नाइलन क्रेट, ट्रैक्टर, जेनरेटर सहित अन्य फ्लड फाइटिंग मटेरियल संवेदनशील तटबंधों के समीप पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखें। गंगा से ज्यादा असर पुनपुन नदी का दिख रहा है, जो ग्रामीण इलाकों को जद में ले रही है। इधर सोन नदी का प्रभाव भी बढ़ा दिख रहा है।
प्रशासन की ओर से आपदा की स्थिति में समन्वय एवं सूचना संग्रहण के लिए जिला स्तर पर 24×7 नियंत्रण कक्ष क्रियाशील बताया गया है। आवश्यक सूचना के लिए दूरभाष संख्या 0612-2210118 एवं मोबाइल नंबर 8235449748 पर संपर्क करने के लिए कहा गया है। सभी संबंधित प्रखंडों में भी प्रखंडस्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित एवं क्रियाशील रखने का निर्देश दिया गया है।
तेजस्वी यादव के क्षेत्र में असल बाढ़ अब आई, बत्ती गुल
पटना से सटे वैशाली जिले में एक हिस्सा आजादी के 80वें साल में भी अछूता बना हुआ है- राघोपुर। पिछले दिनों बाढ़ जैसी स्थिति के नाम पर यहां के विधायक तेजस्वी यादव प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने गए थे। इस इलाके में अब असल में बाढ़ आई है। राघोपुर प्रखंड में स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ के खतरे और जनजीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली कंपनी ने विभिन्न इलाकों के कुल 71 ट्रांसफार्मरों की बिजली आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। इससे प्रखंड के एक बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया है। बाकी परेशानियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।
मुजफ्फरपुर जिले में गंडक के कारण डर
मुजफ्फरपुर जिले में गंडक नदी से प्रभावित होने वाले तीन प्रखंड साहेबगंज, पारू और सरैया के करीब 18 से 20 पंचायत हैं। इनमें से ज्यादातर पंचायत दियारा क्षेत्र के हैं। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन के आंकड़े के अनुसार वर्तमान में गंडक नदी का जलस्तर रेवा घाट पर 53.78 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 54.41 मीटर पर है। दियारा इलाके में कटाव के डर से लोग दिन-रात निगरानी कर रहे हैं।
कटिहार में खेत डूबने के साथ संकट का दायरा बढ़ा
नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार के कई इलाके पहले से ही पानी की मार झेल रहे हैं। अब कटिहार के कुर्सेला में भी बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। कोसी पुल के पास जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब पानी खतरे के निशान से करीब 59 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। आसपास का पूरा निचला इलाका पानी में डूब गया है। कुर्सेला के ग्रामीणों के लिए बढ़ता पानी सिर्फ खेत डूबने का संकट नहीं है, बल्कि अब घर और पशुओं के चारे का सवाल भी खड़ा हो गया है।
समस्तीपुर के कई इलाकों से पलायन तेज
बिहार के समस्तीपुर जिले में बाढ़ का असर कई तरह से पड़ता है। निचले इलाकों से किसानों और पशुपालकों के लिए पलायन की मजबूरी होती है। इस बार भी वह मजबूरी दिख रही है, क्योंकि मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर व विद्यापतिनगर प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा व उसकी सहायक बाया नदियों में जलवृद्धि जारी है। प्रतिदिन करीब 20-30 सेंटीमीटर जलस्तर में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। इससे गंगा रिहायशी इलाकों में दस्तक देने के लिए बेताब है। एक बार फिर से सोतों व ढाबों के आपस में जुड़ जाने से झील का नजारा दिखने लगा है।
मधेपुरा में आवागमन मुश्किल, बाढ़ से लोग परेशान
मधेपुरा के चौसा और आलमनगर प्रखंड क्षेत्र के निचले इलाके में पानी बढ़ने लगा है। कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि से निचले इलाके में आवागमन और मवेशियों के लिए चारा की समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रभावित इलाके में गांव के चारों तरफ पानी घुस जाने के कारण एक बार फिर कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लगी हैं। आलमनगर में 35 जगहों पर नाव का परिचालन शुरू कराया गया है। इसके साथ ही मोटर बोट सहित एसडीआरएफ टीम को तैनात रखा गया है। कोसी का जलस्तर बढ़ने से प्रभावित क्षेत्र की सभी सहायक नदियों में उफान का दौर जारी है। मधेपुरा-खगड़िया-भागलपुर जिला सीमा क्षेत्र से गुजरी कोसी नदी में लगातार हो रही बारिश से जलस्तर वृद्धि होने से कई गांव के निचले प्रभावित होने लगी है। जलस्तर वृद्धि से प्रखंड क्षेत्र के प्रभावित इलाके में कई समस्याएं हैं। कोसी का पानी फैलने से प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।






