हिमाचल- दिल्ली पुलिस पर fir, आधी रात को मजिस्ट्रेट ने तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर भेजा

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ई दिल्ली में एआई समिट के दौरान प्रदर्शन में शामिल तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिला शिमला के चिड़गांव से गिरफ्तार कर ले जा रही दिल्ली पुलिस की टीम को हिमाचल प्रदेश पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बिना सूचना कांग्रेस शासित हिमाचल पहुंची दिल्ली पुलिस के करीब 20 अधिकारियों-कर्मचारियों की तीन गाड़ियों को शिमला के शोघी और सोलन के धर्मपुर में नाके लगाकर रोक लिया गया। दिल्ली पुलिस पर अवैध तरीके से हिरासत में लेने का आरोप लगाकर चिड़गांव थाने में अगवा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके चलते दिल्ली और हिमाचल के बीच टकराव बढ़ गया है।

 

दिनभर तनातनी के बाद देर शाम दिल्ली पुलिस फिर तीनों कार्यकर्ताओं को लेकर रवाना हुई, लेकिन शिमला पुलिस ने उन्हें फिर शोघी नाके पर रोक लिया। देर रात तक टकराव की स्थिति बनी रही। हिमाचल पुलिस का दावा है कि दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैध है। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई से पहले न  ही स्थानीय पुलिस को सूचना दी और न ही उसके पास कार्रवाई करने के लिए वैध दस्तावेज थे। इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार 23 फरवरी से मध्य प्रदेश  और उत्तर प्रदेश के तीन युवकों अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ को स्थानीय युवा कांग्रेस नेता के नाम पर चिड़गांव के मांदली के एक निजी होटल में बुक कमरा नंबर 206 में ठहराया गया था।
बुधवार तड़के करीब 5:00 बजे दिल्ली पुलिस के तीन कर्मचारी वर्दी में होटल पहुंचे। होटल स्टाफ को कमरा खोलने के लिए कहा। इसके बाद दिल्ली पुलिस टीम होटल के रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के साथ तीनों युवकों को साथ लेकर चली गई। सूचना मिलते ही शिमला पुलिस ने नाकाबंदी कर दिल्ली पुलिस की दो गाड़ियों को सुबह 10:00 बजे के करीब शिमला के शोघी बैरियर, जबकि एक गाड़ी को सोलन जिले के धर्मपुर में नाका लगाकर रोक लिया।
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करीब 20 कर्मियों में दिल्ली पुलिस के पांच से छह कर्मचारी वर्दी में, जबकि अन्य सादे कपड़ों में थे। हिमाचल आकर अवैध तरीके से हिरासत में लेने के आरोप में दिल्ली पुलिस पर एफआईआर दर्ज कर शिमला पुलिस दोपहर को जिला कोर्ट पहुंच गई, लेकिन मामले का समाधान नहीं हो सका। हिमाचल पुलिस के मुताबिक दूसरे राज्य की पुलिस को किसी भी अन्य जगह पर गिरफ्तारी करने से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना होता है। इसके साथ ही गिरफ्तारी का वारंट होना जरूरी है। मौके की वीडियोग्राफी के साथ ही स्वतंत्र गवाहों के सामने ही गिरफ्तारी की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। दिल्ली पुलिस ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उनकी कार्रवाई अवैध है।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि सुबह शिमला पुलिस को सूचना मिली कि करीब 15 से 20 अज्ञात लोग सादे कपड़ों में गाड़ी में सवार होकर आए। चिड़गांव के मांदली के एक रिजॉर्ट में ठहरे तीन व्यक्तियों/अतिथियों को जबरन उठाकर ले गए। उन अतिथियों की एक गाड़ी थार को भी अपने साथ ले गए। केस दर्ज कर लिया गया है।

हिमाचल पुलिस की ओर से दिल्ली पुलिस के जवानों को हिरासत में लिए जाने का यह मामला अभी कोर्ट में है। बाद में ही इस मामले में कुछ कह सकेंगे। – संजय गुप्ता, मुख्य सचिव, हिमाचल सरकार

बाहरी राज्यों की जब भी पुलिस हिमाचल आती है तो स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है। दिल्ली पुलिस ने ऐसा नहीं किया। आपसी समन्वय से ही कार्रवाई होती है। – नरेश चौहान, प्रधान मीडिया सलाहकार, सीएम

सीएम से मिले डीजीपी
दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों को हिरासत में लेने के बाद डीजीपी अशोक तिवारी राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुक्खू से मिले। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। डीजीपी ने पुलिस के अधिकारियों, गुप्तचर विभाग के अफसरों के साथ आगामी कार्रवाई पर चर्चा की।

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हिमाचल सदन में छापा मारने पहुंच गई थी दिल्ली पुलिस युकां कार्यकर्ताओं को पकड़ने के लिए रविवार रात को दिल्ली पुलिस हिमाचल सदन पहुंची थी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस तरह की कार्रवाई को गलत करार दिया था।


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