असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार का आज (7 अप्रैल को) थम गया। अब राज्य में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। असम की 126 विधानसभा सीटों पर इस बार 722 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से राष्ट्रीय दलों से 211, राज्य दलों से 116, पंजीकृत दलों ने 137 और 258 निर्दलीय प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं।
असम में कितने मतदाता और मतदान केंद्र?
असम विधानसभा चुनाव 2026 में कुल 2,49,58,139 यानी 2.49 करोड़ मतदाता मतदान करने के योग्य हैं। सुचारू रूप से चुनाव कराने के लिए 126 सीटों पर कुल 31,486 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
असम में इस बार चुनाव में खास चेहरे कौन से हैं?
असम विधानसभा चुनाव 2026 में कई प्रमुख चेहरे चुनावी मैदान में हैं, जो अलग-अलग पार्टियों और गठबंधनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
हिमंत बिस्व सरमा: असम के मौजूदा मुख्यमंत्री और सत्ताधारी भाजपा गठबंधन के प्रमुख नेता हैं। सरमा जालुकबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर कुल तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। सरमा को जालुकबाड़ी सीट पर दो महिलाएं चुनौती दे रही हैं। कांग्रेस ने सरमा के खिलाफ बिदिशा नियोग को टिकट दिया है। वहीं, निर्दलीय दीपिका दास भी यहां से चुनावी मैदान में हैं।
गौरव गोगोई: असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा के मुख्य नेता हैं। गोगोई अभी जोरहाट लोकसभा सीट से सांसद हैं। कांग्रेस ने उन्हें जोरहाट विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। जोरहाट सीट पर चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा ने यहां से हितेंद्र नाथ गोस्वामी को टिकट दिया है। 2021 में गोस्वामी इस सीट से जीते थे। आप के प्रणब प्रियंकुश दत्ता और एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के हेमंत कुमार पेगु भी जोरहाट से चुनावी मैदान में हैं।
अखिल गोगोई: कांग्रेस के विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा में शामिल राइजोर दल के नेता हैं। अखिल सिबसागर सीट से उम्मीदवार हैं। इस सीट पर कुल आठ उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा ने इस सीट से कुशल दोवारी को उतारा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में अखिल यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते थे।
अतुल बोरा: सत्ताधारी गठबंधन में शामिल असम गण परिषद (एजीपी) के नेता हैं। बोरा बोकाखाट निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार हैं। विपक्षी गठबंधन की ओर से हरि प्रसाद सैकिया राइजोर दल के टिकट पर मैदान में हैं। बोकाखाट सीट से कुल छह उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
2026 के चुनावों के लिए नया समीकरण
2026 के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए नवंबर 2025 में कांग्रेस के नेतृत्व में आठ राजनीतिक दलों ने ‘असम संमिलित मोर्चा’ (असोम या एएसओएम) के नाम से एक नया विपक्षी गठबंधन तैयार किया है, ताकि भाजपा और उसके सहयोगियों का मुकाबला किया जा सके। हालांकि, बदरूद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ को इससे बाहर रखा गया है।
असम में क्या हैं इस बार के चुनावी मुद्दे?
असम विधानसभा चुनाव 2026 में कई अहम मुद्दे हावी हैं, जिनमें विकास, मतदाता सूची का विशेष संशोधन (एसआईआर), जातीय पहचान, घुसपैठ और बाढ़ की स्थिति मुख्य मुद्दे के रूप में जगह बना चुके हैं।
घुसपैठ मुक्त असम: भाजपा ने असम को घुसपैठियों से मुक्त बनाने को अपना एक प्रमुख चुनावी हथियार बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रचार के दौरान जनता से ऐसी सरकार चुनने की अपील की है जो घुसपैठियों को घुसने न दे।
बाढ़ और सरकारी कुप्रबंधन: कांग्रेस असम की वार्षिक बाढ़ की समस्या को सरकार के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर खराब योजना, राहत कार्यों में देरी और बराक घाटी जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
जमीन पर कब्जे का मुद्दा: आदिवासी समुदायों की जमीन से जुड़ा मुद्दा भी काफी गरमाया हुआ है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर आदिवासी समुदायों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है, खासकर दीमा हसाओ पहाड़ी जिले के संदर्भ में।







