राउज एवेन्यू जिला अदालत की विशेष अदालत (पीसी एक्ट) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा समेत अधिकांश आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।
विशेष न्यायाधीश सुषांत चंगोत्रा ने बुधवार को दिए आदेश में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 व 70 के तहत संज्ञान लिया, लेकिन आरोपी सत्यानंद याजी के खिलाफ कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अदालत ने राबर्ट वाड्रा समेत समेत सभी आरोपियों को समन जारी किया है।
ईडी ने वर्ष 2018 में दर्ज की गई गुरुग्राम की एफआईआर को आधार बनाकर शिकायत दायर की थी। मामले में आरोप है कि मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (एसएलएचपीएल) ने मेसर्स ओंकरेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (ओपीपीएल) से गुरुग्राम के सेक्टर-83, शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी, लेकिन बिक्री दस्तावेज में झूठा दावा किया गया कि पूरी राशि चेक से चुका दी गई। वास्तव में चेक एनकैश नहीं हुआ और भुगतान बाद में हुआ।
इसके बाद नियमों का उल्लंघन करते हुए वाणिज्यिक कॉलोनी का लाइसेंस हासिल किया गया, जिसे बाद में डीएलएफ को 57 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। ईडी का दावा है कि इससे लगभग 43 करोड़ रुपये की ‘प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम’ बनी, जिसे वाड्रा ने अपनी कंपनियों के जरिए शोधन किया।
अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी, स्काई लाइट रियल्टी, रियल अर्थ एस्टेट्स, ब्लू ब्रिज ट्रेडिंग, नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स, लंबोदर आर्ट एंटरप्राइजेज और एसजीवाई प्रॉपर्टीज तथा केवाल सिंह विर्क के खिलाफ संज्ञान लिया।
हालांकि, अदालत ने आरोपी सत्यानंद याजी को राहत देते हुए उनके खिलाफ कोई संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संतुलन पत्र और अन्य दस्तावेजों में गलत एंट्री का आरोप पीएमएलए की धारा ३ के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि याजी ने बिक्री दस्तावेज के समय कंपनी के निदेशक नहीं थे और संतुलन पत्र में दर्शाई गई राशियां वास्तविक देय राशि थीं।







