कोटा अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के बाद दवाओं की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के लिए भेजे गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल अमानक पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने अलर्ट जारी करते हुए प्रदेशभर में संबंधित बैच की बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि लैब जांच में सामने आया कि बाजार में सप्लाई किए जा रहे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन तत्व ही मौजूद नहीं था। यह इंजेक्शन अमृतसर स्थित मे. जैक्सन लैबोरेट्रीज द्वारा निर्मित बताया गया है। विभाग ने संबंधित बैच को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया है।
हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोटा में जिन प्रसूताओं की मौत हुई, उन्हें यही इंजेक्शन लगाया गया था या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार मृत प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और मामले की जांच अभी जारी है।
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्ट-ऑपरेटिव गायनी वार्ड में हुई मौतों के बाद ड्रग विभाग ने एहतियातन अस्पताल और ड्रग स्टोर से 30 से अधिक दवाओं के सैंपल जांच के लिए लिए थे। इनमें से अब तक 21 दवाओं की रिपोर्ट सुरक्षित आई है, जबकि बाकी दवाओं की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को संदिग्ध दवा स्टॉक के उपयोग और वितरण पर रोक लगाने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बाकी दवाओं की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इनका कहना है
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) को निर्देश जारी कर संदिग्ध दवा स्टॉक के उपयोग और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी कोटा और बूंदी के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्ट-ऑपरेटिव गायनी वार्ड और ड्रग स्टोर से विभिन्न दवाओं के नमूने लिए थे और तक़रीबन 30 से अधिक दवाओं के सैम्पल लिए गए थे, जिसमें 21 दवाएं सेफ पाई गई हैं और अन्य दवाओं के जांच परिणाम भी विभाग को जल्दी ही प्राप्त हो जाएंगे।
-अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर







